Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से आए उद्यमियों, निवेशकों और औद्योगिक प्रतिनिधियों का छत्तीसगढ़ में स्वागत करते हुए प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और यहां उपलब्ध निवेश संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी पारंपरिक औद्योगिक ताकत के साथ नई अर्थव्यवस्था और उभरते उद्योगों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खनिज, ऊर्जा, वन संपदा, मानव संसाधन और देश के मध्य में स्थित होने की भौगोलिक स्थिति प्रदेश की प्रमुख ताकत हैं। राज्य सरकार इन क्षमताओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और निवेशक हितैषी नीतियों से जोड़कर छत्तीसगढ़ को प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की भूमिका केवल उद्योगों के लिए नियामक की नहीं है, बल्कि उद्योग और निवेश की राह आसान करने वाले सहयोगी और ‘एक्सीलरेटर’ के रूप में सरकार को विकसित किया जा रहा है। निवेश प्रस्ताव आने से लेकर उद्योग की स्थापना तक हर चरण में निवेशकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई के विस्तार से स्थानीय स्तर पर उद्यमिता बढ़ती है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक गतिविधियों का लाभ व्यापक वर्ग तक पहुंचता है। उन्होंने बताया कि लघु उद्योग भारती देशभर के 750 से अधिक जिलों में उद्यमियों को संगठित कर रही है, जबकि छत्तीसगढ़ के 25 जिलों में 1200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्योग संगठन से जुड़े हैं। 18 से 20 सितंबर तक आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों की भागीदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह औद्योगिक मेला केवल उत्पादों और तकनीकों की प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि उद्यमियों के बीच संवाद, अनुभव, नवाचार और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का मंच भी है। इससे नए व्यावसायिक संबंध विकसित होंगे और युवाओं को उद्योग एवं उद्यमिता की दुनिया को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उद्योग जगत, निवेशकों और विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू की गई है। इसका उद्देश्य निवेश आकर्षित करने के साथ ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें निवेश, उत्पादन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था एक साथ आगे बढ़ें। नीति में प्रक्रियाओं के सरलीकरण, निवेश प्रोत्साहन, नए एवं उभरते सेक्टरों को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब केवल कोयला, स्टील और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी जैसे नए क्षेत्रों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 1100 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर परियोजना पर कार्य प्रारंभ होना बदलते औद्योगिक परिदृश्य का उदाहरण है। नवा रायपुर को आधुनिक टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने के साथ टेक्नोलॉजी हब और इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने के उद्देश्य से सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योग स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल किया गया है। उद्योगों को समय पर आवश्यक भूमि, अधोसंरचना और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि उद्यमी प्रक्रियागत जटिलताओं के बजाय उत्पादन, नवाचार, विस्तार और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज यहां उपलब्ध हैं। इन संसाधनों का प्रदेश के भीतर अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रदेश का 44 प्रतिशत से अधिक भू-भाग वनाच्छादित है और यहां इमली, महुआ, चिरौंजी, हर्रा-बहेड़ा सहित अनेक लघु वनोपज और औषधीय संसाधन उपलब्ध हैं। इनके वैज्ञानिक प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन से वनांचल में उद्योग और रोजगार की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र को भी प्रदेश की औद्योगिक क्षमता का मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 30 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता है और ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं। पर्याप्त बिजली, जल संसाधन, मानव संसाधन, प्राकृतिक संपदा और देश के मध्य में स्थित होने का भौगोलिक लाभ प्रदेश को उद्योगों के लिए अनुकूल बनाता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने से जुड़ा है। नई औद्योगिक नीति में स्थानीय रोजगार को विशेष महत्व दिया गया है और अधिक संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए प्रोत्साहन के प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का युवा केवल रोजगार तलाशने वाला न रहे, बल्कि अपने कौशल, नवाचार और उद्यमशीलता के बल पर रोजगार देने वाला भी बने।
मुख्यमंत्री ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में उद्योगों के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। बस्तर के जलप्रपात, घने वन, प्राकृतिक स्थल और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। होम-स्टे जैसी पहलों के माध्यम से पर्यटन को स्थानीय परिवारों की आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर का 14वां संस्करण छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास यात्रा के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देशभर के उद्यमियों को उत्पाद, तकनीक, नवाचार और अनुभव साझा करने तथा नई व्यावसायिक संभावनाएं तलाशने का अवसर प्रदान करेगा। उद्योगों के विस्तार से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि नई औद्योगिक नीति में निवेशकों को आकर्षित करने और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। सरकार के प्रयासों से प्रदेश में निवेश प्रस्ताव आने के साथ उनका क्रियान्वयन भी धरातल पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि छोटे और बड़े नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं और इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
लघु उद्योग भारती के प्रकाश चंद्र गुप्त ने बताया कि संगठन पिछले 32 वर्षों से देश के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को संगठित करने और उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं को केंद्र तथा राज्य सरकारों तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लघु एवं विकेंद्रीकृत उद्योगों को आधुनिक बाजार, नई तकनीक और मजबूत व्यावसायिक नेटवर्क से जोड़ने की आवश्यकता है।
इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 में देश और प्रदेश की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा स्टॉल लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री साय ने मेले के विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर प्रदर्शित उत्पादों, तकनीकों और नवाचारों की जानकारी ली। प्रदर्शनी में पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों एवं उपचार पद्धतियों से लेकर आधुनिक मशीनरी, आईटी और नवीन तकनीक आधारित औद्योगिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और औद्योगिक प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए उनकी गतिविधियों, नई तकनीकों और औद्योगिक अनुभवों की जानकारी ली। उन्होंने आयोजन को देशभर के उद्यमियों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए लघु उद्योग भारती के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर आयोजन में योगदान देने वाले पदाधिकारियों, सदस्यों और प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी तथा देशभर से आए उद्यमी और औद्योगिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

