Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी है। सरकार ने भूमि विकास से जुड़े मौजूदा नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट तैयार किया है। इसमें अलग-अलग लैंड यूज के हिसाब से यह तय किया गया है कि किस श्रेणी की जमीन पर कौन-सी गतिविधियां या निर्माण नहीं किए जा सकेंगे। हालांकि, ये अभी प्रस्तावित नियम हैं और अंतिम रूप से लागू नहीं हुए हैं। ड्राफ्ट पर 23 सितंबर तक आपत्ति और सुझाव दिए जा सकते हैं।
आवास एवं पर्यावरण विभाग की ओर से जारी ड्राफ्ट में आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्धसार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद और कृषि समेत सात तरह के लैंड यूज के लिए अलग-अलग प्रतिबंध प्रस्तावित किए गए हैं। आवासीय भूमि पर हरित, नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योगों के अलावा गोदाम, कबाड़खाने, बूचड़खाने, संक्रामक रोग अस्पताल, जेल, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों और गैस का भंडारण प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही पशुपालन, मछली पालन, डेयरी, पोल्ट्री फार्म, दाह संस्कार स्थल, कब्रिस्तान और खनन गतिविधियों पर भी रोक प्रस्तावित है।
व्यावसायिक भूमि पर नारंगी, लाल और नीली श्रेणी के उद्योगों के साथ खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटकों के भंडारण, पशु और मछली पालन, डेयरी, पोल्ट्री, दाह संस्कार स्थल, कब्रिस्तान और खनन गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है। औद्योगिक भूमि पर कर्मचारी आवास और डॉरमेट्री को छोड़कर आवासीय टाउनशिप विकसित नहीं की जा सकेगी।
सार्वजनिक एवं अर्द्धसार्वजनिक भूमि पर कर्मचारी आवास को छोड़कर टाउनशिप, पोल्ट्री और गोदाम जैसी गतिविधियों पर रोक प्रस्तावित की गई है। परिवहन भूमि पर आवासीय बस्तियां, खतरनाक रसायनों का भंडारण, असंगत वाणिज्यिक गतिविधियां और नारंगी, लाल व नीली श्रेणी के उद्योग प्रतिबंधित किए जाने का प्रस्ताव है।
आमोद-प्रमोद के लिए निर्धारित भूमि पर आवासीय बस्तियां, सभी तरह के उद्योग, वाणिज्यिक परिसर, प्रदूषणकारी गतिविधियां, खनन, डेयरी और दाह संस्कार स्थल-कब्रिस्तान जैसी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं कृषि भूमि पर अफोर्डेबल हाउसिंग और इंटीग्रेटेड टाउनशिप को छोड़कर बड़े मॉल के निर्माण पर रोक प्रस्तावित की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार का प्रयास नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों, निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भूमि उपयोग व्यवस्था को अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। प्रस्तावित बदलावों से बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाने में मदद मिलेगी।

