Raipur News: प्रमुख जलाशयों में 54.60% जलभराव, पिछले वर्ष से 23% अधिक पानी उपलब्ध

Raipur News: प्रमुख जलाशयों में 54.60% जलभराव, पिछले वर्ष से 23% अधिक पानी उपलब्ध

Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन से पहले जल संसाधनों की स्थिति उत्साहजनक बनी हुई है। जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई जलाशयों में कुल 3329.41 मिलियन घनमीटर (एमसीयूएम) जल उपलब्ध है, जो कुल भंडारण क्षमता का 52.35 प्रतिशत है। यह आंकड़ा पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है।

प्रमुख जलाशयों में 54.60 प्रतिशत जल संग्रहित

राज्य के 12 प्रमुख जलाशयों की कुल डिजाइन क्षमता 5355.709 एमसीयूएम है, जिसके विरुद्ध वर्तमान में 2924.319 एमसीयूएम जल संग्रहित है। यह कुल क्षमता का 54.60 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में प्रमुख जलाशयों में मात्र 31.56 प्रतिशत जल था, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा केवल 26 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

मध्यम जलाशयों की स्थिति में भी सुधार

राज्य के 34 मध्यम जलाशयों की कुल क्षमता 1004.519 एमसीयूएम है, जिसके मुकाबले वर्तमान में 405.089 एमसीयूएम पानी उपलब्ध है। यह उनकी कुल क्षमता का 40.33 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी समय यह आंकड़ा 28.83 प्रतिशत और वर्ष 2024 में 26.48 प्रतिशत था।

मुरूमसिल्ली जलाशय सबसे अधिक भरा

जल संसाधन विभाग के अनुसार धमतरी जिले का मुरूमसिल्ली जलाशय 81.50 प्रतिशत क्षमता के साथ सबसे अधिक भरा हुआ है। इसके अलावा कांकेर का दूधावा जलाशय 74.70 प्रतिशत, मुंगेली का मनियारी जलाशय 75.61 प्रतिशत, कबीरधाम का छिरपानी जलाशय 75.64 प्रतिशत और कोरिया का झुमका जलाशय 71.29 प्रतिशत जलभराव के साथ बेहतर स्थिति में हैं।

मिनीमाता बांगो में 56 प्रतिशत से अधिक पानी

प्रदेश के सबसे बड़े मिनीमाता बांगो जलाशय में वर्तमान में 1626.21 एमसीयूएम जल उपलब्ध है, जो इसकी कुल क्षमता का 56.19 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां केवल 25.64 प्रतिशत जल उपलब्ध था। वहीं रविशंकर सागर (गंगरेल) में 48.97 प्रतिशत, तांदुला में 44.79 प्रतिशत, खरंग में 64.59 प्रतिशत और सोंढूर में 62.65 प्रतिशत जल संग्रहित है।

सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को मिलेगा लाभ

जलाशयों में बेहतर जल भंडारण से आगामी खरीफ सीजन में सिंचाई व्यवस्था मजबूत रहने की उम्मीद है। साथ ही पेयजल आपूर्ति और जल प्रबंधन के लिए भी यह स्थिति राहत देने वाली मानी जा रही है। विभाग के अनुसार वर्तमान जल संग्रहण पिछले वर्ष की तुलना में काफी बेहतर है और किसानों के लिए यह सकारात्मक संकेत है।


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