Raipur News: जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बनने की ओर छत्तीसगढ़, ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान चर्चा में

Raipur News: जल संरक्षण का राष्ट्रीय मॉडल बनने की ओर छत्तीसगढ़, ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान चर्चा में

Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान को जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ी पहल बताया है। सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह अभियान अब सरकारी योजना से आगे बढ़कर जनभागीदारी का आंदोलन बन चुका है, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण के व्यापक कार्य किए जा रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के तहत अब तक प्रदेशभर में 6.60 लाख से अधिक जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इनसे 19.23 लाख घनमीटर से अधिक अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित होने का दावा किया गया है। सरकार का कहना है कि इन प्रयासों से भू-जल स्तर में सुधार के साथ किसानों के खेतों में सिंचाई की सुविधा बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

11 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों की भागीदारी

सरकार के अनुसार, इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनभागीदारी है। प्रदेश की 11 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों ने इसमें सक्रिय भूमिका निभाई है। तालाब, डबरी, चेक डैम, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोखता गड्ढों जैसी संरचनाओं का निर्माण विभिन्न विभागों और मनरेगा के समन्वय से किया गया है।

तकनीक और जागरूकता पर भी जोर

अभियान में GIS तकनीक और ‘जलदूत ऐप’ का उपयोग कर जल स्तर की निगरानी की जा रही है। वहीं 11 हजार से अधिक पंचायत भवनों की दीवारों पर भू-जल स्तर अंकित करने, रैलियों, दीवार लेखन और जनसंवाद के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया है। सरकार का कहना है कि 626 क्लस्टरों में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए 56 हजार से अधिक लोगों को जल प्रबंधन की जानकारी दी गई है।

किसानों को मिलने का दावा

सरकार के मुताबिक, ‘नवा तरिया, आय के जरिया’ पहल के माध्यम से सिंचाई सुविधाओं को मजबूत किया गया है, जिससे किसानों को समय पर पानी उपलब्ध हो रहा है और फसल उत्पादन व आय में वृद्धि होने का दावा किया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि यदि गांव मजबूत होंगे तो राज्य और देश भी मजबूत होंगे। सरकार का दावा है कि ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान भविष्य में जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में भी स्थापित हो सकता है।


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