Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। राजधानी और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश के बीच संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले चार दिनों से बारिश से बनी परिस्थितियों के बीच लोगों को राहत और व्यवस्थाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में जिला प्रशासन ने सेंध जलाशय, नवा रायपुर और शहीद वीर नारायण सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के आसपास मॉकड्रिल कर अपनी आपदा प्रबंधन तैयारियों को परखा।
मॉकड्रिल में बाढ़, पानी में फंसे लोगों और बच्चों-पशुओं के रेस्क्यू के साथ LPG टैंकर हादसे और गैस रिसाव जैसी आपात स्थितियों से निपटने का अभ्यास किया गया। NDRF, SDRF, पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई, PWD, बिजली और अन्य विभागों ने इसमें हिस्सा लिया।
चार दिन से बारिश, अब तैयारियों की परीक्षा
लगातार बारिश के बीच जब लोगों को जलभराव और संभावित बाढ़ की चिंता बनी हुई है, तब प्रशासन की ओर से मॉकड्रिल के जरिए तैयारियों को परखा जाना चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह है कि जब पिछले चार दिनों से बारिश की स्थिति बनी हुई है, तो प्रभावित इलाकों में राहत और व्यवस्था को लेकर प्रशासन की सक्रियता कितनी प्रभावी रही?
मॉकड्रिल में अधिकारियों ने रेस्क्यू टीमों की कार्रवाई और विभागों के बीच समन्वय का जायजा लिया। लेकिन वास्तविक परिस्थितियों में आम लोगों को समय पर राहत और सुरक्षित निकासी मिल पाएगी या नहीं, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
डूबते व्यक्ति के रेस्क्यू का किया अभ्यास
परसदा गांव में पानी में एक व्यक्ति के डूबने की सूचना मिलने का परिदृश्य तैयार किया गया। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और संबंधित विभागों को अलर्ट किया गया। इसके बाद NDRF और SDRF की टीम बोट और आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची और व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया। रेस्क्यू के बाद CPR देने और घायल को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई।
मॉकड्रिल से ज्यादा जरूरी जमीनी राहत?
प्रशासन का कहना है कि इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा के दौरान विभागों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। साथ ही मॉकड्रिल के जरिए व्यवस्थाओं में मौजूद कमियों को चिन्हित कर उन्हें दूर करने की बात कही गई है।
हालांकि, लगातार बारिश के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि मॉकड्रिल में दिखाई गई तैयारियां वास्तविक संकट के समय जमीन पर कितनी कारगर साबित होंगी? चार दिन से बारिश की स्थिति के बीच यदि लोगों को अभी भी जलभराव, बाढ़ और राहत व्यवस्था को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो सिर्फ अभ्यास नहीं बल्कि समय पर जमीनी कार्रवाई भी जरूरी है।

