Raipur Cyber Fraud Case: रायपुर। राजधानी रायपुर में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर एक अकाउंटेंट से 16 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने सोशल मीडिया के जरिए पहले विश्वास जीता और फिर अलग-अलग बैंक खातों एवं यूपीआई आईडी में रकम ट्रांसफर कराकर लाखों रुपये हड़प लिए। मामला विधानसभा थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुई ठगी
पीड़ित शंकर बोस सड्डू स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के निवासी हैं और महालेखाकार कार्यालय में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 5 फरवरी 2026 को फेसबुक पर काव्या चौधरी नाम की एक युवती की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी।
दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता गया। बातचीत के दौरान युवती ने खुद को क्रिप्टोकरेंसी निवेश की विशेषज्ञ बताते हुए कम समय में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा दिया।
व्हाट्सएप पर जोड़ा दूसरे आरोपी से
कुछ दिनों बाद शंकर बोस को व्हाट्सएप के माध्यम से हर्षद करवा नामक व्यक्ति से जोड़ा गया। आरोपी ने उन्हें Nincoin.com नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश करने की सलाह दी। शुरुआत में छोटी रकम निवेश कराकर कुछ लाभ दिखाया गया, जिससे पीड़ित का भरोसा बढ़ गया।
इसके बाद सिक्योरिटी वेरिफिकेशन, कॉन्ट्रैक्ट प्रोसेसिंग और अन्य शुल्कों के नाम पर लगातार पैसे जमा कराने का सिलसिला शुरू हो गया।
10 किश्तों में ट्रांसफर कराए 16 लाख रुपये
शिकायत के अनुसार 11 फरवरी से 18 मार्च 2026 के बीच पीड़ित ने आरोपियों के बताए अनुसार 10 अलग-अलग किश्तों में रकम ट्रांसफर की। इस दौरान कुल 16 लाख 7 हजार 106 रुपये विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई आईडी में भेजे गए।
जब उन्होंने निवेश की गई राशि और कथित मुनाफा निकालने का प्रयास किया तो आरोपियों ने भुगतान जारी करने के लिए अतिरिक्त शुल्क जमा करने की मांग शुरू कर दी। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
लोन लेकर भी भेजी रकम
पीड़ित ने बताया कि आरोपियों के कहने पर उन्होंने कई बार बैंक से ऋण लेकर भी भुगतान किया। इसके कारण अब उन पर ईएमआई का अतिरिक्त बोझ आ गया है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटी हृदय रोग से पीड़ित है और पत्नी का इलाज भी चल रहा है, जिससे परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
शिकायत के आधार पर विधानसभा थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, यूपीआई आईडी और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यमों और बैंकिंग ट्रेल की भी पड़ताल की जा रही है।
साइबर ठगी से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां
- सोशल मीडिया पर दिखने वाले निवेश संबंधी विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करें।
- किसी भी निवेश से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और वैधता की जांच करें।
- अनजान टेलीग्राम या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने से बचें।
- निवेश से पहले वित्तीय विशेषज्ञों या विश्वसनीय लोगों से सलाह लें।
- अलग-अलग बैंक खातों में बार-बार पैसे भेजने से सतर्क रहें।
- यदि कोई संस्था लगातार खाते बदलकर भुगतान मांग रही है तो यह ठगी का संकेत हो सकता है।
- किसी भी संदिग्ध निवेश प्रस्ताव की जानकारी नजदीकी साइबर थाने या साइबर हेल्पलाइन से सत्यापित करें।
- लालच देने वाले “कम समय में अधिक मुनाफा” जैसे दावों से सावधान रहें।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले निवेश प्रस्तावों और अनजान व्यक्तियों की सलाह पर धन निवेश करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें, ताकि साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बचा जा सके।

