Balrampur News: जहां बेजुबानों का इलाज होना था, वहां सिस्टम बीमार! पस्ता पशु चिकित्सालय की बदहाली पर उठे सवाल

Balrampur News: जहां बेजुबानों का इलाज होना था, वहां सिस्टम बीमार! पस्ता पशु चिकित्सालय की बदहाली पर उठे सवाल

CG Balrampur News: बलरामपुर। जिले के पस्ता स्थित शासकीय पशु चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और पशुपालकों का आरोप है कि अस्पताल में पशु चिकित्सक की नियमित उपलब्धता नहीं रहती, जिसके चलते उपचार के लिए पहुंचने वाले पशुपालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार और पूरे मामले की जांच की मांग की है।

डॉक्टर की अनुपस्थिति में उपचार का आरोप

पशुपालकों का आरोप है कि चिकित्सालय में कई मौकों पर डॉक्टर की अनुपस्थिति में अन्य कर्मचारी पशुओं के उपचार से जुड़े कार्य करते नजर आते हैं। इससे पशुओं के इलाज की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभाग के अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है।

फील्ड कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

स्थानीय लोगों ने चिकित्सालय में पदस्थ फील्ड कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन कर्मचारियों की जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर पशुपालकों को पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की है, वे कथित तौर पर अधिकतर समय अस्पताल में ही मौजूद रहते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इसका सीधा असर दूरदराज के पशुपालकों पर पड़ता है और जरूरत के समय उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती।

जर्जर भवन से हादसे का खतरा

पशु चिकित्सालय के भवन की स्थिति भी चिंता का विषय बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक भवन की छत और दीवारें जर्जर हैं। बारिश के दौरान पानी टपकने की शिकायत भी सामने आई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने संबंधित विभाग से भवन का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की है।

कचरे और नाली के पास मिली सरकारी दवाइयां?

मामले में सबसे गंभीर सवाल सरकारी पशु चिकित्सा दवाइयों के रखरखाव को लेकर उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कुछ सरकारी दवाइयां कथित तौर पर कचरे और नाली के आसपास पड़ी मिलीं। यदि यह दावा जांच में सही पाया जाता है तो सरकारी दवाइयों के भंडारण और रखरखाव की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। स्थानीय लोगों ने दवाइयों के स्टॉक, वितरण और रखरखाव की जांच कराने की मांग की है।

जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

पशुपालकों और स्थानीय लोगों ने कलेक्टर तथा पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि चिकित्सालय में डॉक्टर की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने, फील्ड कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने, जर्जर भवन की मरम्मत कराने और सरकारी दवाइयों के रखरखाव की जांच कराने की जरूरत है।

अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन और पशुपालन विभाग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है। बेजुबान पशुओं के इलाज के लिए बनाए गए इस सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाएं कब सुधरेंगी और पशुपालकों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा कब मिलेगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।


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