Bilaspur News: दहेज मृत्यु मामले में सास बरी, हाईकोर्ट ने 7 साल की सजा रद्द की

Bilaspur News: दहेज मृत्यु मामले में सास बरी, हाईकोर्ट ने 7 साल की सजा रद्द की

CG Bilaspur News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दहेज प्रताड़ना और दहेज मृत्यु के एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी सास को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि मृतका को मौत से ठीक पहले दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 7 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा को भी निरस्त कर दिया गया।

2006 में हुई थी विवाहिता की मौत

मामला दुर्ग जिले का है, जहां सोनल का विवाह 18 जून 2006 को मनीष के साथ हुआ था। विवाह के करीब छह माह बाद 21 दिसंबर 2006 को सोनल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने सास शशिकला बाफना पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और अतिरिक्त रकम की मांग करने का आरोप लगाया था।

निचली अदालत ने सुनाई थी 7 साल की सजा

मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी सास के खिलाफ दहेज मृत्यु का मामला दर्ज किया था। वर्ष 2010 में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दुर्ग ने आरोपी को दोषी मानते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए मिली राहत

अपील की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि एफआईआर घटना के पांच दिन बाद दर्ज की गई थी और दहेज मांग का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं था। गवाहों ने भी स्वीकार किया कि आरोपी ने उनके सामने कभी दहेज की मांग नहीं की थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस रजनी दुबे की एकलपीठ ने कहा कि दहेज मृत्यु का मामला साबित करने के लिए यह आवश्यक है कि महिला को मौत से ठीक पहले दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया हो। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह तथ्य साबित नहीं हो सका।

कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में केवल सास-बहू के सामान्य पारिवारिक विवादों का उल्लेख है, जबकि दहेज के लिए क्रूरता का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।

दोषसिद्धि का आदेश निरस्त

हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालत ने साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया और गलत निष्कर्ष पर पहुंची। इसके बाद अदालत ने आरोपी सास की अपील स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि और सजा के आदेश को निरस्त कर उन्हें सभी आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया।


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