Chhattisgarh Latest News: बचेली से शिकागो तक बस्तर की बेटी ने बढ़ाया प्रदेश का मान, दीपाली सरावगी को मिलेगा अप्रवासी भारतीय सम्मान

Chhattisgarh Latest News: बचेली से शिकागो तक बस्तर की बेटी ने बढ़ाया प्रदेश का मान, दीपाली सरावगी को मिलेगा अप्रवासी भारतीय सम्मान

Chhattisgarh Latest News: छत्तीसगढ़। दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के बचेली में जन्मीं दीपाली सरावगी को ‘छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। अमेरिका के शिकागो में रहकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति, कला और विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयासों के लिए राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश सरकार ने उनका चयन किया है। दीपाली दुनिया के 19 देशों में बसे छत्तीसगढ़ियों को अपनी मातृभूमि और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम कर रही हैं।

दीपाली सरावगी उत्तर अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन और प्रवासी भारतीय एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ (नाचा) की संस्थापक हैं। वह वर्तमान में संगठन की कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनके नेतृत्व में नाचा अमेरिका, यूरोप, सिंगापुर, जर्मनी, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और नॉर्डिक देशों सहित 19 देशों में सक्रिय संगठन बन चुका है।

दीपाली ‘दि ट्राइबल्स फाउंडेशन’ की संस्थापक-अध्यक्ष भी हैं। पिछले चार वर्षों से अमेरिका में आयोजित हो रहे भारतीय स्वदेशी मेले के आयोजन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह मेला अमेरिका के प्रमुख भारतीय सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल हो चुका है, जिसमें 30 हजार से अधिक लोग भाग लेते हैं। इस आयोजन के माध्यम से भारत के 50 से अधिक पारंपरिक हस्तशिल्प कलाकारों को अमेरिका में अपनी कला और उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।

सम्मान के लिए चयनित होने पर दीपाली सरावगी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी प्रेस विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार जताया है। संगठन नाचा की ओर से कहा गया कि बचेली से शिकागो तक का उनका सफर हर छत्तीसगढ़िया के लिए प्रेरणादायक है। यह सम्मान दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को अपनी जड़ों और मातृभूमि से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करेगा।

दीपाली का बचेली से गहरा नाता रहा है। उनके स्वजन कृष्णा कर ने बताया कि उनके पिता पीके सरावगी राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) की बचेली परियोजना में कार्यरत थे और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। दीपाली का जन्म बचेली में हुआ और उनकी शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय बचेली में हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में उच्च शिक्षा प्राप्त की।

बस्तर की आदिवासी कला और छत्तीसगढ़ की संस्कृति से गहरा लगाव रखने वाली दीपाली वर्ष 2009 में अपने पति गणेश कर के साथ अमेरिका चली गईं। उनके पति शिकागो में मैकेनिकल इंजीनियर हैं। अमेरिका में रहने के बावजूद दीपाली लगातार बस्तर और छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के लिए काम कर रही हैं।


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