Chhattisgarh Khairagarh News: खैरागढ़। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही कथित तथ्यहीन और भ्रामक सामग्री को लेकर विश्वविद्यालय परिवार ने आपत्ति जताई है। शिक्षकों का कहना है कि किसी व्यक्ति या संस्था पर गंभीर आरोप लगाने से पहले उनके समर्थन में तथ्य, दस्तावेज और प्रमाण होना जरूरी है। बिना साक्ष्य आरोपों का प्रचार-प्रसार विश्वविद्यालय की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
विश्वविद्यालय परिवार के अनुसार, कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के कार्यकाल में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षकों ने समय पर परीक्षा परिणाम जारी किए जाने को भी प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि पूर्व वर्षों में परीक्षा परिणाम अक्टूबर तक लंबित रहने की स्थिति सामने आती रही है।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की व्यवस्था को लेकर शिक्षकों ने कहा कि यह आवश्यकता आधारित व्यवस्था है और विश्वविद्यालय में पूर्व में भी इसी तरह की व्यवस्था संचालित होती रही है। डीन की नियुक्ति लोकभवन स्तर से होने की बात कहते हुए शिक्षकों ने कहा कि इसे सीधे कुलपति के स्तर से जोड़ना उचित नहीं है।
सीएसए पदोन्नति और अन्य नियुक्तियों को लेकर विश्वविद्यालय परिवार ने कहा कि यदि किसी प्रकार की विसंगति होने का दावा है तो संबंधित दस्तावेज और प्रमाण सक्षम स्तर पर प्रस्तुत किए जाने चाहिए। शिक्षकों ने कहा कि विधिसम्मत शिकायत या जांच का विश्वविद्यालय परिवार स्वागत करता है, लेकिन अनुमान और अपुष्ट जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया पर सामग्री प्रसारित करना उचित नहीं है।
निरीक्षण दल में बाहरी सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शिक्षकों ने कहा कि यह संबंधित अध्यादेश में किए गए प्रावधानों के अनुरूप है। इसी तरह डॉक्टरेट योग्यताधारी व्यक्ति के मेट्रन पद पर होने को उन्होंने उच्च शैक्षणिक योग्यता का विषय बताया और कहा कि इसे अयोग्यता के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
रायगढ़ में हुई प्रस्तुति के दौरान प्राप्त सम्मान राशि को लेकर विश्वविद्यालय परिवार ने दावा किया कि संबंधित कलाकार ने यह राशि स्वेच्छा से दान की थी। वहीं, वर्तमान दीक्षांत समारोह का आयोजन पूर्व के दीक्षांत समारोह और खैरागढ़ महोत्सव की तुलना में कम खर्च में किए जाने की बात भी शिक्षकों ने कही।
ग्राफिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित संबंधित आईडी विश्वविद्यालय के किसी छात्र की नहीं है और इसे फर्जी बताया गया है। विश्वविद्यालय परिवार ने कहा कि यदि फर्जी पहचान या दस्तावेजों के माध्यम से विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित करने का प्रयास किया गया है तो इसकी तथ्यात्मक जांच होनी चाहिए।
विश्वविद्यालय परिवार ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित भ्रामक सामग्री पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी भी शिकायत या आरोप के लिए विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। शिक्षकों के अनुसार शिकायतों की जांच और तथ्यों को सामने लाने के लिए सक्षम संस्थागत माध्यम उपलब्ध हैं। विश्वविद्यालय की गरिमा और प्रतिष्ठा की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

