लेमरू के वनांचल में ‘संजीवनी 108’ बनी जीवनरक्षक, दूरस्थ गांवों तक पहुंची त्वरित स्वास्थ्य सेवा

लेमरू के वनांचल में ‘संजीवनी 108’ बनी जीवनरक्षक, दूरस्थ गांवों तक पहुंची त्वरित स्वास्थ्य सेवा

Chhattisgarh Korba News: कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के दुर्गम वनांचल क्षेत्र लेमरू में अब स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जिला मुख्यालय से 80–90 किलोमीटर दूर बसे इस इलाके में लंबे समय तक आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का अभाव रहा, लेकिन अब ‘संजीवनी 108’ एंबुलेंस सेवा ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश और पहल पर लेमरू क्षेत्र में इस अत्याधुनिक एंबुलेंस की तैनाती की गई है, जिससे अब एक कॉल पर ही मरीजों को त्वरित उपचार मिल रहा है। यह सेवा विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू के अंतर्गत आने वाले लगभग 20 गांवों की 16 हजार से अधिक आबादी को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। गढ़उपरोड़ा, देवपहरी, अरसेना, नकिया, रापा, बड़गांव, छातीबहार, लामपहाड़ और डोकरमना जैसे दूरस्थ गांव अब इस सेवा से जुड़ चुके हैं।

संजीवनी 108 एंबुलेंस केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि एक चलती-फिरती मिनी अस्पताल है। इसमें ऑक्सीजन, पल्स ऑक्सीमीटर, बीपी-शुगर जांच उपकरण, डिलीवरी किट, बर्न किट, सक्षन मशीन सहित कई जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर जैसी उन्नत सुविधा भी दी गई है और प्रशिक्षित ईएमटी स्टाफ 24 घंटे सेवा में तैनात रहता है।

पिछले एक वर्ष में इस सेवा के माध्यम से करीब 1200 मरीजों को समय पर इलाज मिल चुका है। हृदयघात, सड़क दुर्घटना, सर्पदंश, प्रसव जटिलताओं और मलेरिया-डेंगू जैसी बीमारियों में यह सेवा कई लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई है।

जहां पहले मरीजों को चारपाई पर ढोकर अस्पताल ले जाना पड़ता था, वहीं अब एंबुलेंस की सायरन सुनते ही ग्रामीण रास्ता बना देते हैं। हाल ही में जिले को मिली 12 नई एंबुलेंस में से एक को विशेष रूप से लेमरू में तैनात किया गया है, जिससे जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था और मजबूत हुई है।

इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें निजी वाहनों पर खर्च नहीं करना पड़ता और समय पर इलाज मिल रहा है। लेमरू के ग्रामीणों के लिए ‘संजीवनी 108’ सेवा अब भरोसे और जीवन सुरक्षा का प्रतीक बन चुकी है।


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