Chhattisgarh Durg News : दुर्ग। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, दुर्ग के तत्वावधान में आदर्श विद्यालय में महान क्रांतिकारी सुखदेव राजगुरु की प्रतिमा अनावरण एवं जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘क्रांतिकारी सुखदेव राजगुरु अमर रहें’ के जयघोष से आयोजन स्थल गूंज उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल रहे। अध्यक्षता भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने की। विशिष्ट अतिथि महापौर अल्का वाघमर, बी.के. वर्मा, झरना वर्मा, शासकीय प्राथमिक शाला से सरिता चंद्राकर, पार्षद शेखर चंद्रा एवं प्रदेश संयोजक महेश चंद्र शर्मा उपस्थित रहे।
महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि क्रांतिकारी सुखदेव राजगुरु जैसे महान सपूतों ने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र व्यक्ति से बड़ा होता है और ऐसे वीर क्रांतिकारियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।
बी.के. वर्मा ने बताया कि सुखदेव राजगुरु के जीवन पर आधारित पुस्तक के प्रथम संस्करण का विमोचन वर्ष 2024 में ग्राम अंडा में किया गया था। कार्यक्रम में पुस्तक के दूसरे संस्करण का भी विमोचन किया गया, जिसमें उनके परिवार और जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को शामिल किया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने कहा कि क्रांतिकारी सुखदेव राजगुरु की प्रतिमा का अनावरण सभी के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने उपस्थित लोगों को उनके आदर्शों पर चलने और ‘क्रांतिकारी सुखदेव राजगुरु अमर रहें’ का संकल्प दिलाया।
महापौर अल्का वाघमर ने कहा कि सुखदेव राजगुरु की 91वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा का अनावरण होना खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि यह पुण्यभूमि है, लेकिन आज भी अनेक लोग स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के इतिहास से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। उन्होंने भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ को बधाई देते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी पेंशनर्स अपने अनुभव और ज्ञान से समाज एवं बच्चों को संस्कार देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्कार के बिना शिक्षा का महत्व अधूरा है।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि महान क्रांतिकारी सुखदेव राजगुरु ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका जीवन त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें महान क्रांतिकारी की प्रतिमा का अनावरण करने का अवसर मिला।
सांसद बघेल ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि संस्कार और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने का केंद्र भी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए युवा पीढ़ी को अपने इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सपूतों के बलिदान से परिचित होना आवश्यक है।
उन्होंने विभाजन की पीड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विभाजन के दौरान लाखों लोगों ने अमानवीय परिस्थितियों का सामना किया। आज की युवा पीढ़ी को उस इतिहास और विभाजन की त्रासदी को जानना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम को केवल 15 अगस्त या 26 जनवरी के अवसर पर याद करने के बजाय पूरे वर्ष वीर सपूतों और संतों के त्याग एवं बलिदान से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने क्रांतिकारी सुखदेव राजगुरु के आदर्शों पर चलने और उनके बलिदान एवं राष्ट्रभक्ति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

