Chhattisgarh Latest News: नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर केंद्र-राज्य सरकार का जोर, बस्तर में रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की तैयारी

Chhattisgarh Latest News: नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर केंद्र-राज्य सरकार का जोर, बस्तर में रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की तैयारी

Chhattisgarh Latest News: रायपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब हिंसा से प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। पाँच दशकों तक नक्सलवाद ने बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब नक्सलवाद की निशानियों को मिटाकर बस्तर को खुशहाल और समृद्ध बनाना है। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों और दिव्यांगजनों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।

अमित शाह दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर के दूसरे चरण का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारंभ करते हुए संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों के कुल 768 दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया जाएगा। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 हितग्राही शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी क्रम में नक्सली हिंसा से प्रभावित दिव्यांग आदिवासी भाई-बहनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे, जिनमें बस्तर के 1,570 से अधिक लोग शामिल थे।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिक दिव्यांग हुए। यह गंभीर मानवीय पीड़ा है, जिसके समाधान के लिए केवल नक्सलवाद का अंत पर्याप्त नहीं है। प्रभावित लोगों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने और आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक और कृत्रिम अंग जैसे उपकरण जरूरतमंदों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इस कार्य में राज्य सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और सहयोगी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

अमित शाह ने बस्तर में शांति और विकास के लिए राज्य सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, ‘नियद नेल्लानार’ योजना और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना जैसी पहलें क्षेत्र में बदलाव लाने में मदद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जिस बस्तर में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं, वहाँ अब युवा खेलों में भाग ले रहे हैं और अपनी जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं। ‘नियद नेल्लानार’ के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने का काम भी किया जा रहा है।

नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के संबंध में अमित शाह ने बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उनके अनुसार, 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई है। 455 लोगों को नौकरी तथा 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं और 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए, 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई और संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 सड़क परियोजनाएँ शुरू की गई हैं। क्षेत्र में 670 पुलियों का निर्माण भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं और इलवाद पंचायत पुरस्कार के तहत 44 पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान 500 से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए थे। इनमें से 200 से अधिक शिविरों को अब ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों पर सरकारी अधिकारी बैठकर स्थानीय जरूरतों के अनुसार जनसेवा, विकास और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए स्थापित ये केंद्र अब स्थानीय लोगों को सुविधाएँ और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सलवाद की चुनौती से मुक्ति मिली है। यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के साहस, पराक्रम और बलिदान तथा बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है। उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में शहीद हुए जवानों और हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर को तेज गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ाना और देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाना सरकार का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, दूरसंचार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उनके अनुसार, 500 से अधिक गाँवों में सड़क और बिजली की सुविधाएँ पहुँची हैं तथा 431 स्कूल खोले गए हैं। गाँवों में राशन दुकानों की व्यवस्था से लोगों को राहत मिली है। सरकार का प्रयास है कि बस्तर के अंतिम गाँव और अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुँचे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा शिविरों को सेवा केंद्रों में बदलने से स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। शहीद वीर गुंडाधुर के गाँव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है, जहाँ स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियाँ भी शुरू की गई हैं। आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण तथा आजीविका संबंधी कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए कृषि, पशुपालन और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार भी जरूरी है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है और डेयरी विकास के लिए समझौता किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इंद्रावती नदी पर देउरगाँव और मटनार में सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं से लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा में अंग गंवाने वाले लोगों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराना केवल सहायता का कार्य नहीं, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर देना है। दंतेवाड़ा शिविर में 768 दिव्यांगजनों को विभिन्न उपकरण दिए जाएंगे। उन्होंने इस पहल में सहयोग देने वाली भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और अन्य संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया तथा शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएँ देते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटों के कारण अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने हाथ-पैर गंवाए और कई लोगों की आँखों की रोशनी चली गई। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सहायता का अभियान निरंतर जारी रहेगा तथा सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति आवश्यक मदद से वंचित न रहे।

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने दिव्यांगजनों से संवाद कर उनके अनुभव भी जाने। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायाँ पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद वे दोबारा चलने लगे हैं और देशसेवा के लिए तैयार हैं। बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में मछली पकड़ने जाते समय आईईडी विस्फोट में उनका दायाँ पैर चला गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद अब वे फिर चल पा रहे हैं। वहीं दंतेवाड़ा जिले के अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर खुशी जताई।

कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।


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