CG Assembly Monsoon Session: रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को माओवादी हिंसा के खात्मे और प्रदेश में शांति बहाली को लेकर सदन में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार, सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस के सहयोग के लिए विशेष आभार प्रस्ताव पेश किया, जिसे चर्चा के बाद सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। सत्ता पक्ष ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि लंबे समय से माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास और शांति का नया अध्याय शुरू हो चुका है। वहीं, कांग्रेस ने इस प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया और पूरी प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी।
कोटा से कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत के निर्देश पर कांग्रेस विधायकों ने इस प्रस्ताव पर चर्चा में भाग नहीं लेने का फैसला किया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके शासनकाल में माओवादी हिंसा समाप्त करने के लिए कभी गंभीर प्रयास नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब कांग्रेस का चर्चा से दूर रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सदन में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, विधायक अजय चंद्राकर, किरण सिंह देव, लता उसेंडी सहित कई सदस्यों ने चर्चा में भाग लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की सराहना की।
सुरक्षा और विकास की संयुक्त रणनीति से मिली सफलता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, राज्य पुलिस और अर्धसैनिक बलों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में केवल सुरक्षा अभियान चलाने तक सीमित न रहकर सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति अपनाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा अभियानों की लगातार समीक्षा की गई, पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए गए और केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया। इसी का परिणाम है कि माओवादी संगठनों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सका और प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को भी गति मिली।
2024 में बनी कार्ययोजना बनी निर्णायक
मुख्यमंत्री ने बताया कि 24 अगस्त 2024 को रायपुर में माओवादी हिंसा प्रभावित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक के बाद माओवादी हिंसा के समूल उन्मूलन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई। इसके तहत सुरक्षा अभियानों को तेज किया गया और साथ ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, संचार तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया।
उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा से मुक्ति के बाद अब सरकार का पूरा ध्यान बस्तर के समग्र, समावेशी और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित है। इसके लिए ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से बस्तर को देश के अग्रणी जनजातीय संभाग के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जाएंगे।
कांग्रेस पर मुख्यमंत्री का तीखा हमला
सदन की कार्यवाही के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब भी सदन में किसी बड़े और महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होती है, कांग्रेस उससे पलायन कर जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवादी हिंसा से मिली मुक्ति पूरे छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के लोगों की जीत है। उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा के कारण कांग्रेस ने भी अपने कई नेताओं को खोया है, इसलिए ऐसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा से दूर रहना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीति और नीयत दोनों इस विषय पर स्पष्ट नहीं हैं और उनमें इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा करने का साहस भी नहीं है।
रमन सिंह ने भी विपक्ष को घेरा
विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी कांग्रेस के रुख की आलोचना की। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि विपक्ष माओवादियों के विरोध में कुछ भी सुनना नहीं चाहता, जबकि यह मुद्दा पूरे प्रदेश की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने प्रदेश में शांति स्थापित करने में केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों के योगदान को सम्मान देते हुए धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया है, जो स्वागत योग्य कदम है। डॉ. रमन सिंह ने अपने 15 वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे दौर भी देखे हैं, जब एक साथ 65-65 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था और माओवादियों ने कई संचार टावरों को ध्वस्त कर दिया था। आज परिस्थितियां बदल रही हैं और यह छत्तीसगढ़ के लिए सकारात्मक संकेत है।
बस्तर में विकास पर सरकार का विशेष फोकस
सरकार का कहना है कि माओवादी हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण के बाद अब बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पर्यटन, रोजगार, कृषि और जनजातीय विकास से जुड़ी योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा। ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के माध्यम से क्षेत्र को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकार का दावा है कि सुरक्षा और विकास के संतुलित मॉडल से बस्तर में स्थायी शांति, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

