Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सर्विस टैक्स वसूली से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी प्रोपराइटरशिप फर्म के मालिक की मृत्यु के बाद उसके कानूनी वारिसों से सर्विस टैक्स की बकाया राशि की वसूली नहीं की जा सकती, यदि संबंधित कानून में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान मौजूद नहीं है। अदालत ने विभाग द्वारा जारी रिकवरी और गार्निशी नोटिस को निरस्त कर दिया।
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने भिलाई निवासी देवन अनीषा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वैधानिक प्रावधान के अभाव में मृतक की कर देनदारी स्वतः उसके कानूनी वारिसों पर स्थानांतरित नहीं की जा सकती।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता के पति स्वर्गीय महेंद्रन रूपेश नायडू एक प्रोपराइटरशिप फर्म संचालित करते थे। विभाग ने वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए सर्विस टैक्स बकाया बताते हुए वर्ष 2020 में कर और जुर्माना निर्धारित किया था। बाद में अपील भी खारिज हो गई। वर्ष 2023 में महेंद्रन रूपेश नायडू के निधन के बाद विभाग ने उनकी पत्नी और बैंक खातों के खिलाफ रिकवरी नोटिस जारी कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीलाभ दुबे ने तर्क दिया कि प्रोपराइटरशिप फर्म की कोई अलग कानूनी पहचान नहीं होती और फाइनेंस एक्ट में मृतक के कानूनी वारिसों से सर्विस टैक्स वसूली का कोई प्रावधान नहीं है। वहीं विभाग ने दलील दी कि कर निर्धारण आदेश मालिक के जीवित रहते पारित हो चुका था, इसलिए वसूली की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के शबीना अब्राहम बनाम कलेक्टर ऑफ सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स मामले का हवाला देते हुए कहा कि फाइनेंस एक्ट और सेंट्रल एक्साइज एक्ट में मृत करदाता के वारिसों से वसूली के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान नहीं हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने 13 दिसंबर 2024 को जारी रिकवरी और मांग नोटिस को रद्द कर दिया तथा विभाग को भविष्य में कानूनी वारिसों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं करने के निर्देश दिए।

