Chhattisgarh Bilaspur News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पेंशन पात्रता से जुड़े मामले में नगर निगम रायपुर की पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मुख्य सुनवाई के दौरान जो तथ्य पेश नहीं किए गए, उन्हें बाद में रिव्यू याचिका के जरिए सामने लाकर आदेश में बदलाव नहीं कराया जा सकता।
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने यह फैसला नगर निगम रायपुर द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। मामला नगर निगम के दिवंगत कर्मचारी श्याम के विधिक वारिसों को पेंशन लाभ दिए जाने से जुड़ा है।
दरअसल, हाई कोर्ट ने 21 अप्रैल 2026 को पारित अपने आदेश में कहा था कि यदि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) का फैसला कर्मचारियों के पक्ष में आता है, तो नगर निगम संबंधित वारिसों को अतिरिक्त पेंशन लाभ प्रदान करेगा।
नगर निगम ने रिव्यू याचिका में दलील दी कि संबंधित कर्मचारी अंशदायी भविष्य निधि (CPF) योजना का सदस्य था और उसने पेंशन के लिए आवश्यक 10 वर्ष की अर्हतादायी सेवा भी पूरी नहीं की थी। हालांकि, अदालत ने पाया कि ये सभी तर्क मुख्य सुनवाई के दौरान प्रस्तुत ही नहीं किए गए थे।
हाई कोर्ट ने कहा कि रिव्यू याचिका का उद्देश्य नई दलीलों के आधार पर दोबारा सुनवाई करना नहीं है। रिकॉर्ड में किसी प्रकार की प्रत्यक्ष कानूनी त्रुटि भी नहीं पाई गई, इसलिए पुनर्विचार याचिका स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता।
इसी के साथ अदालत ने नगर निगम रायपुर की रिव्यू याचिका खारिज कर दी और अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखा।

