Chhattisgarh Bastar News: बस्तर। अखिल भारतीय नौजवान सभा (AIYF) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) की बस्तर जिला इकाई के संयुक्त तत्वावधान में छात्र, युवा, किसान, मजदूर और आदिवासियों से जुड़े मुद्दों को लेकर जगदलपुर में छात्र-युवा बदलाव रैली और धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन के बाद संभाग आयुक्त, बस्तर संभाग के माध्यम से छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम 14 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
संगठनों ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं के निजीकरण और बाजारीकरण पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि गरीब, मजदूर और वंचित वर्गों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके साथ ही युवाओं के लिए रोजगार को कानूनी अधिकार बनाने और संसद में ‘भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून’ पारित करने की मांग रखी गई।
प्रदर्शनकारियों ने जेलों में लंबे समय से बंद आदिवासियों के मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध समीक्षा कर निर्दोष लोगों को रिहा करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा बस्तर के नगरनार स्थित एनएमडीसी इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट के रणनीतिक विनिवेश और निजीकरण के फैसले को निरस्त कर इसे सार्वजनिक क्षेत्र में बनाए रखने की मांग की गई।
ज्ञापन में पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को जल, जंगल, जमीन और खनिजों पर वास्तविक अधिकार देने के लिए पेसा (PESA) कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई। वहीं राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं के आरक्षण प्रावधानों को पारदर्शी तरीके से लागू करने तथा निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार देने की मांग भी शामिल रही।
संगठनों ने बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण, आवश्यक खाद्य पदार्थों, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों को कम करने तथा राशन वितरण प्रणाली को मजबूत करने की मांग की। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम कोड को रद्द करने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जनविश्वास बनाए रखने के लिए मतपत्र यानी बैलेट पेपर व्यवस्था पर विचार करने की मांग उठाई गई।
ज्ञापन में दलितों और आदिवासियों पर होने वाले अत्याचारों पर रोक लगाने, वन अधिकार अधिनियम के तहत मूल निवासियों को उनके वास्तविक कब्जे के आधार पर पट्टा देने, छत्तीसगढ़ के नीट छात्रों को प्राथमिकता देने और स्वास्थ्य सहित अन्य विभागों में आउटसोर्सिंग समाप्त कर नियमित भर्ती करने की मांग भी रखी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए स्कूलों से शिक्षकों के अटैचमेंट को समाप्त कर उन्हें उनकी मूल शालाओं में पदस्थ करने की मांग भी की गई।
संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन की ओर से इन जनसरोकार से जुड़ी मांगों पर निर्धारित समय-सीमा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

