Chhattisgarh Latest News Today: रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नारायणपुर जिले में सुशासन और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। जिले के ओरछा विकासखंड के सुदूर और दुर्गम लंका गांव में दो दिवसीय विशेष प्रशासनिक शिविर का आयोजन कर प्रशासन ने यह साबित कर दिया कि अब विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही है।
दुर्गम रास्तों को पार कर गांव तक पहुंचा प्रशासन
जिला मुख्यालय से करीब 130 किलोमीटर दूर, इंद्रावती नदी के किनारे बसे लंका गांव—जो कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है—में आजादी के बाद पहली बार जिला स्तरीय शिविर आयोजित किया गया। प्रशासनिक टीम ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को पार करते हुए ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर ही समाधान किया।
‘सुशासन एक्सप्रेस’ बनी ग्रामीणों के लिए राहत
शिविर का मुख्य आकर्षण ‘सुशासन एक्सप्रेस’ रही। वाई-फाई युक्त इस मोबाइल सेवा वाहन के माध्यम से आधार कार्ड, जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र सहित 27 प्रकार के दस्तावेज तत्काल बनाए गए। इससे ग्रामीणों को बार-बार जिला मुख्यालय जाने की जरूरत से राहत मिली। अब तक इस पहल के जरिए 17,520 आवेदनों का त्वरित निस्तारण किया जा चुका है।
शिविर में उमड़ा ग्रामीणों का जनसैलाब
दो दिवसीय शिविर में लंका सहित आसपास के पांच गांवों के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कुल 310 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 242 का मौके पर ही निराकरण किया गया। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 179, मनरेगा जॉब कार्ड के 34, राशन कार्ड के 25 और स्वास्थ्य संबंधी 18 आवेदन प्रमुख रहे।
प्रशासन के प्रति बढ़ा भरोसा
कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत आयोजित ये शिविर अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में शासन की मजबूत उपस्थिति का प्रमाण हैं। इससे ग्रामीणों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा है और वे विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 29 और 30 अप्रैल को आदनार में अगला शिविर आयोजित होगा, जिससे मलमेटा, कोंजे और बोडुम गांवों के ग्रामीणों को लाभ मिलेगा। सुशासन का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।

