Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप सिंडिकेट के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पण के बाद रायपुर लाया गया, जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने उसे कड़ी सुरक्षा के बीच विशेष अदालत में पेश किया। एजेंसी अब सट्टेबाजी के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और सिंडिकेट से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच के लिए उसकी कस्टोडियल रिमांड मांगने की तैयारी में है।
CBI को उम्मीद है कि चंद्राकर से पूछताछ के दौरान सट्टेबाजी के अवैध कारोबार, विदेशी बैंक खातों और देश-विदेश में फैले कथित हवाला नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारियां मिल सकती हैं। जांच में प्रभावशाली राजनेताओं, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक कथित तौर पर पहुंचाई जाने वाली संरक्षण राशि यानी ‘प्रोटेक्शन मनी’ के पहलू को भी खंगाला जा रहा है। हालांकि, एजेंसी ने अब तक किसी आधिकारिक खुलासे या आरोपी के औपचारिक बयान की पुष्टि नहीं की है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव सट्टा ऐप के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल समेत विभिन्न खेलों पर ऑनलाइन दांव लगवाने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में 3,000 से अधिक पैनल और अवैध शाखाएं संचालित की जा रही थीं। इस नेटवर्क के जरिए होने वाली कमाई को कथित तौर पर पहले बेनामी या म्यूल बैंक खातों में जमा कराया जाता था। इसके बाद लेन-देन की कड़ियों को छिपाने के लिए कई स्तरों पर रकम का हस्तांतरण कर हवाला के माध्यम से विदेश भेजे जाने का आरोप है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सितंबर 2026 में अदालत में दाखिल शिकायत में इस प्लेटफॉर्म से करीब 94,400 करोड़ रुपये के कथित अवैध लेन-देन का अनुमान जताया था। यह आंकड़ा एजेंसी की जांच पर आधारित है। चंद्राकर की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के बाद अब जांच एजेंसियां इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की कड़ियों का पता लगाने में जुटी हैं।
मुख्य प्रमोटर के कानून के शिकंजे में आने के बावजूद महादेव सट्टा ऐप से जुड़े डिजिटल ढांचे की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पड़ताल में ‘महादेवऑनलाइन डॉट कॉम’ और ‘महादेवबुक्ज डॉट कॉम’ जैसे डोमेन इंटरनेट पर मौजूद पाए गए हैं। इनमें से पहली वेबसाइट सामान्य तौर पर भारत में ब्लॉक बताई जाती है, लेकिन VPN के जरिए इसे एक्सेस किए जाने की जानकारी सामने आई है। अप्रैल 2021 में रजिस्टर किया गया यह डोमेन वर्ष 2027 तक पंजीकृत है और इसका तकनीकी सर्वर लोकेशन मुंबई दर्ज है।

