Raipur Latest News: आयुष्मान योजना में अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई, वरदान हॉस्पिटल का पंजीयन 3 साल के लिए निरस्त

Raipur Latest News: आयुष्मान योजना में अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई, वरदान हॉस्पिटल का पंजीयन 3 साल के लिए निरस्त

Chhattisgarh Raipur News: रायपुर। राजधानी के शंकरनगर स्थित वरदान हॉस्पिटल पर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के दुरुपयोग के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ राज्य नोडल एजेंसी ने अस्पताल का पंजीयन तीन साल के लिए निरस्त कर दिया है। इस अवधि में अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों को भर्ती नहीं कर सकेगा। साथ ही अस्पताल परिसर से योजना से संबंधित सभी प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य स्तरीय जांच दल ने 30 सितंबर 2026 को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में जनरल वार्ड, प्राइवेट वार्ड और आईसीयू में भर्ती मरीजों के बेड उपलब्ध नहीं मिले। नर्सिंग स्टेशन पर मरीजों की फाइल और डॉक्टर के नोट भी नहीं पाए गए। जांच दल द्वारा दस्तावेज मांगे जाने पर अस्पताल प्रबंधन ने करीब चार घंटे बाद उन्हें उपलब्ध कराया।

निरीक्षण के दौरान पहली मंजिल के जनरल वार्ड में अनुपपुर, मध्यप्रदेश के चार मरीज एक ही स्थान पर मिले। जांच में सामने आया कि इन मरीजों को एक एजेंट के माध्यम से अस्पताल लाया गया था। वहीं, आईसीयू में भर्ती दो मरीजों का निदान एक्यूट एब्डोमेन और निमोनिया बताया गया था, लेकिन दो दिन से भर्ती होने के बावजूद उनके चेस्ट एक्स-रे और एब्डोमेन एक्स-रे नहीं कराए गए थे। जांच दल ने इसे अनावश्यक रूप से आईसीयू में भर्ती किए जाने का मामला माना।

जांच में अन्य कमियां भी सामने आईं। अस्पताल में जांच रजिस्टर उपलब्ध नहीं था और आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के लिए अलग रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया था। केस फाइल में जरूरी दस्तावेजों का समुचित संधारण नहीं मिला। एक मरीज पीताम्बर कुंभार लिपोमा की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के पैकेज में बुक किया गया था। इसके अलावा पैथोलॉजिस्ट डॉ. संजीव तिवारी की नियुक्ति या अनुबंध से जुड़े दस्तावेज भी जांच दल को नहीं मिले। जांच में सामान्य लक्षण वाले मरीजों को गंभीर बीमारी का निदान देकर योजना के तहत बुक किए जाने की प्रवृत्ति भी सामने आई।

इन अनियमितताओं को लेकर अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। अस्पताल ने 12 अक्टूबर 2026 को ईमेल के माध्यम से अपना स्पष्टीकरण भेजा। इसमें मरम्मत कार्य के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित होने, दस्तावेज उपलब्ध कराने में देरी, एजेंट के माध्यम से मरीज नहीं लाने और आईसीयू में मरीज भर्ती नहीं होने का दावा किया गया। प्रबंधन ने प्री-एनएबीएच मान्यता और चिकित्सकीय प्रक्रिया का भी हवाला दिया। पीताम्बर कुंभार के मामले में अस्पताल ने एंजाइम बढ़ने के आधार पर एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का निदान बताते हुए लिपोमा की सर्जरी बाद में कराने की सलाह देने की बात कही।

हालांकि, जांच एजेंसी ने अस्पताल के स्पष्टीकरण को तथ्यात्मक और समाधानकारक नहीं माना। जांच दल के अनुसार मरीजों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों से अनावश्यक भर्ती, गलत पैकेज बुकिंग, जरूरी दस्तावेजों के अभाव और एजेंटों के माध्यम से मरीज लाकर योजना का दुरुपयोग किए जाने की पुष्टि हुई। एजेंसी ने इन कृत्यों को योजना के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन और गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में माना।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के जुलाई 2026 के दिशा-निर्देशों की कंडिका 6.4.1 के तहत कार्रवाई करते हुए अस्पताल का पंजीयन तीन साल के लिए निरस्त किया गया है। इस दौरान वरदान हॉस्पिटल आयुष्मान योजना के तहत नए मरीज भर्ती नहीं कर सकेगा और उसे परिसर से योजना संबंधी प्रचार सामग्री भी हटानी होगी। अधिकारियों के अनुसार, आयुष्मान योजना का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे मामलों में कार्रवाई का उद्देश्य योजना के दुरुपयोग पर रोक लगाना और पात्र हितग्राहियों तक इसका लाभ पहुंचाना है।


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