Chhattisgarh Latest News: छत्तीसगढ़। केंद्रीय GST और केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में पदोन्नति सहित लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर अधीक्षकों ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ सुपरिंटेंडेंट्स ऑफ सेंट्रल टैक्स (AIASCT) के नेतृत्व में शुरू होने वाले इस आंदोलन का असर छत्तीसगढ़ सहित देशभर के विभागीय कार्यालयों में देखने को मिल सकता है। एसोसिएशन ने 23 से 27 नवंबर तक काली पट्टी पहनकर काम करने और 9 दिसंबर को देशभर के मुख्यालयों में प्रदर्शन करने का कार्यक्रम तय किया है।
एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल रवीश चंद्र के अनुसार, लंबित मांगों को लेकर अधिकारियों की ओर से उचित माध्यम से व्यक्तिगत अभ्यावेदन दिए जा रहे हैं। एक नवंबर से सोशल मीडिया के जरिए भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। इसके बाद 23 से 27 नवंबर तक काली पट्टी बांधकर विरोध जताया जाएगा। 9 दिसंबर को भोजनावकाश के दौरान प्रदर्शन और गेट मीटिंग आयोजित की जाएगी।
एसोसिएशन का कहना है कि केंद्रीय GST अधीक्षकों के कैडर में लंबे समय से पदोन्नति के अवसर सीमित हैं। कई अधिकारी लगभग तीन दशक की सेवा के बाद भी केवल एक पदोन्नति के साथ सेवानिवृत्त हो रहे हैं। संगठन ने इस स्थिति को दूर करने के लिए कैरियर प्रगति से जुड़े नियमों और व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
प्रमुख मांगों में वर्ष 2014 के बाद की अखिल भारतीय वरिष्ठता सूचियों (AISLs) को अंतिम रूप देकर जारी करना और सहायक आयुक्त के पद पर पदोन्नति के लिए लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया पूरी करना शामिल है। इसके अलावा व्यापक कैडर पुनर्गठन की मांग भी उठाई गई है। एसोसिएशन के मुताबिक, पिछला पुनर्गठन वर्ष 2014 में हुआ था और इसकी समीक्षा हर पांच वर्ष में होनी थी, लेकिन अब तक नया पुनर्गठन नहीं किया गया है।
AIASCT की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की 12 और 13 सितंबर को भोपाल में हुई बैठक में इन मुद्दों पर देशभर के प्रतिनिधियों ने चर्चा की थी। बैठक में पदोन्नति, सेवा शर्तों, कैरियर प्रगति और अधिकारियों के कल्याण से जुड़े प्रस्ताव पारित किए गए थे।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ठोस और समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत Work-to-Rule, असहयोग आंदोलन, आधिकारिक कार्यों के लिए निजी मोबाइल फोन का इस्तेमाल बंद करने, आधिकारिक व्हाट्सऐप समूहों से बाहर निकलने और धरना जैसे कार्यक्रम भी किए जा सकते हैं।

