Chhattisgarh Durg News: दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पिकअप वाहन के गुप्त चेंबर से मिले करीब 4 करोड़ रुपये की राशि को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। इस रकम पर शाह परिवार की ओर से दावा करते हुए न्यायालय में सुपुर्दगी के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग श्रीमती अंजली सिंह की अदालत ने सुनवाई के बाद जब्त राशि सौंपने की मांग को खारिज कर दिया है।
बता दें कि 25 अक्टूबर को खुर्सीपार पुलिस ने एक खाली पिकअप वाहन के सीक्रेट बॉक्स से करीब 4 करोड़ रुपये जब्त किए थे। इस मामले में रकम प्राप्त करने के लिए कमलेश आर. शाह, खुशबू शाह और खुशाली शाह की ओर से न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
नीना कमलेश शाह के व्यवसाय से जुड़ा बताया गया पैसा
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के मुताबिक, आवेदकों की ओर से अधिवक्ताओं ने न्यायालय में तर्क दिया कि कमलेश शाह की पत्नी नीना कमलेश शाह अपने जीवनकाल में मेसर्स मेक टेक नाम से कृषि आधारित विभिन्न व्यवसाय बड़े पैमाने पर संचालित करती थीं। फर्म का पंजीयन भारत सरकार के उद्योग विभाग में था और फर्म करोड़ों रुपये का कारोबार करती थी।
फर्म द्वारा करोड़ों रुपये का आयकर जमा करने का दावा
आवेदन में बताया गया कि फर्म ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1,08,22,242 रुपये का आयकर जमा किया था। फर्म का नियमित ऑडिट होता है और उसके पास नकद एवं बैंक जमा राशि भी होने का दावा किया गया। फर्म का एक कार्यालय नागपुर में भी स्थित बताया गया। आवेदकों के अनुसार, नीना कमलेश शाह का वर्ष 2025 में निधन हो गया था। इसके बाद उनकी पुत्रियां खुशबू और खुशाली शाह उनकी विधिक वारिस हैं।
अभियोजन पक्ष ने आयकर जांच का दिया हवाला
अभियोजन पक्ष की ओर से चार अधिवक्ताओं ने आवेदन पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका तर्क था कि जब्त की गई राशि के संबंध में आयकर विभाग ने जांच शुरू कर दी है। ऐसे में रकम आवेदकों को सौंपने से जांच प्रभावित हो सकती है। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय से आवेदन निरस्त करने की मांग की।
17 पेज के फैसले में कोर्ट ने खारिज किया दावा
न्यायालय ने कमलेश आर. शाह निवासी गांधीनगर, गुजरात और खुशबू शाह व खुशाली शाह की ओर से प्रस्तुत आवेदन को औचित्यहीन मानते हुए खारिज कर दिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग विजय अग्रवाल ने बताया कि रकम प्राप्त करने के लिए न्यायालय में आवेदन लगाया गया था। अदालत ने 17 पेज का निर्णय सुनाते हुए आवेदकों की ओर से प्रस्तुत दावों को खारिज कर दिया है।

