Kabirdham News: कबीरधाम में सड़क हादसे में पति की मौत के बाद महिला को राहत, बीमा कंपनी को 20 लाख रुपये और 6% ब्याज देने का आदेश

Kabirdham News: कबीरधाम में सड़क हादसे में पति की मौत के बाद महिला को राहत, बीमा कंपनी को 20 लाख रुपये और 6% ब्याज देने का आदेश

Chhattisgarh Kabirdham News: कबीरधाम। सड़क हादसे में पति की मौत के बाद दुर्घटना बीमा राशि के लिए लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाली महिला को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से राहत मिली है। आयोग ने बीमा कंपनी को 20 लाख रुपये की बीमा राशि देने का निर्देश दिया है। साथ ही मृत्यु की तारीख से छह महीने बाद की अवधि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करने को कहा है। आयोग ने जिला और राज्य उपभोक्ता आयोग के पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए कंपनी को चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है।

अधिवक्ता राजेश कुमार भावनानी के अनुसार, यह मामला कबीरधाम जिले की बोड़ला तहसील के माराडबरा गांव की तिहारो चिचाम से जुड़ा है। उनके पति गणेश चिचाम का छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बोड़ला शाखा में बचत खाता था। बैंक के माध्यम से एक हजार रुपये प्रीमियम लेकर उनके नाम पर व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी जारी की गई थी। पॉलिसी के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये देने का प्रावधान था।

जानकारी के अनुसार, 19 नवंबर 2023 को गणेश चिचाम मोटरसाइकिल से तरेगांव जंगल से अपने गांव लौट रहे थे। मछलीरवां मंदिर के पास सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए के तहत अपराध दर्ज किया था। पति की मौत के बाद तिहारो चिचाम ने बीमा राशि के लिए दावा किया, लेकिन कंपनी ने मृतक की कथित लापरवाही और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट का हवाला देते हुए भुगतान से इनकार कर दिया।

इसके बाद महिला ने जिला उपभोक्ता आयोग, कबीरधाम में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। राज्य उपभोक्ता आयोग ने भी जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद तिहारो चिचाम ने अधिवक्ता राजेश कुमार भावनानी के माध्यम से राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील की।

राष्ट्रीय आयोग ने 8 अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में पाया कि मृतक की लापरवाही साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। आयोग के अनुसार, केवल एफआईआर और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उचित नहीं था। रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट में भी विषैले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं हुई थी।

इन तथ्यों के आधार पर राष्ट्रीय आयोग ने निचले दोनों उपभोक्ता आयोगों के आदेश निरस्त कर दिए और तिहारो चिचाम को बीमा पॉलिसी के तहत 20 लाख रुपये पाने का हकदार माना। बीमा कंपनी को निर्धारित समयसीमा में राशि और निर्देशानुसार ब्याज का भुगतान करना होगा।


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