Bastar News: ओडिशा की भारी बारिश से बस्तर की रेल और सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित, केके रेल लाइन पर कई जगह लैंडस्लाइड

Bastar News: ओडिशा की भारी बारिश से बस्तर की रेल और सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित, केके रेल लाइन पर कई जगह लैंडस्लाइड

Chhattisgarh Bastar News: बस्तर: ओडिशा में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बस्तर की रेल और सड़क कनेक्टिविटी पर भी दिखाई देने लगा है। किरंदुल-कोत्तावालसा (केके) रेल लाइन पर जयपुर के आगे कोरापुट की तरफ 4 से 5 जगहों पर लैंडस्लाइड होने के साथ रेल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर परिचालन प्रभावित होने की स्थिति बन गई है।

कोरापुट-रायगड़ा रेल लाइन पर भी लैंडस्लाइड और सुरंग में रेलपथ पर पानी भरने की घटनाएं सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि गुरुवार रात से केके रेल लाइन के अलग-अलग हिस्सों में लगातार बारिश के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

2014 के हुदहुद तूफान के बाद बड़ा नुकसान

केके रेल लाइन पर इससे पहले अक्टूबर 2014 में हुदहुद तूफान के दौरान भारी बारिश से बड़ा नुकसान हुआ था। उस समय बस्तर को आंध्र प्रदेश से जोड़ने वाली रेल लाइन के जयपुर-कोरापुट रेलखंड में करीब 29 स्थानों पर लैंडस्लाइड और पटरी बहने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद अब एक बार फिर भारी बारिश के कारण इस रेल मार्ग को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के बीच रेल पटरियों की सुरक्षा और आवागमन को लेकर चुनौती बढ़ गई है।

नेशनल हाईवे भी बाढ़ से प्रभावित

बारिश का असर सड़क मार्गों पर भी पड़ा है। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर जगदलपुर और केशलूर के बीच आवागमन बाधित होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग-63 पर भी बीजापुर जिले में एक-दो स्थानों पर बाढ़ के कारण सड़क बंद होने की खबर है। इससे बस्तर के कई इलाकों में सड़क और रेल दोनों मार्गों से आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बन गई है।

बालोद में स्कूल खुलने के बाद छुट्टी का आदेश

इधर, भारी बारिश के बीच बालोद जिले में शिक्षा विभाग के आदेश को लेकर भी स्थिति असमंजस वाली रही। मौसम विभाग की ओर से पिछले तीन दिनों से भारी बारिश की चेतावनी जारी की जा रही थी, लेकिन स्कूल बंद करने का आदेश 25 सितंबर को स्कूल खुलने के बाद जारी किया गया।

25 सितंबर की सुबह जिले के सरकारी और निजी स्कूल अपने निर्धारित समय पर खुल चुके थे। इसके बाद सुबह स्कूलों में छुट्टी का आदेश जारी किया गया। इससे बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। भारी बारिश के बीच स्कूलों को लेकर समय पर निर्णय नहीं होने से अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के सामने भी स्थिति स्पष्ट नहीं रही।


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