Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। राजनीति में अफवाहों और कयासों का दौर हमेशा चलता रहता है। कई बार परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि चर्चाओं को भी हवा मिलने लगती है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों कुछ ऐसा ही माहौल दिखाई दे रहा है। एक बार फिर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों और मीडिया में जोर पकड़ने लगी हैं। हालांकि फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है और पूरी चर्चा कयासों पर आधारित है।
इस बार इन चर्चाओं को बल मिलने की एक वजह भाजपा के प्रदेश संगठन में संभावित बदलाव को माना जा रहा है। इसके साथ ही केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं को भी छत्तीसगढ़ की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू को केंद्र की जिम्मेदारी से मुक्त कर प्रदेश भाजपा संगठन की कमान सौंपी जा सकती है। ऐसी स्थिति में उनकी जगह छत्तीसगढ़ के किसी अन्य सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
इन्हीं संभावित राजनीतिक बदलावों के बीच राज्य में साय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यदि केंद्र और प्रदेश भाजपा संगठन में बदलाव होता है तो इसका असर राज्य सरकार के समीकरणों पर भी पड़ सकता है। मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को जगह मिलने और कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। साथ ही विभागों में भी व्यापक फेरबदल की संभावना को लेकर चर्चा है।
मौजूदा स्थिति को देखें तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित मंत्रिमंडल में कुल 14 सदस्य हैं, जिनमें दो उपमुख्यमंत्री शामिल हैं। मंत्रिमंडल में रामविचार नेताम, केदार कश्यप और दयालदास बघेल भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी चेहरे हैं, जो पूर्ववर्ती रमन सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। वहीं मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य पहली बार मंत्री बने हैं।
सामाजिक समीकरण की बात करें तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कृषि मंत्री रामविचार नेताम और वन मंत्री केदार कश्यप आदिवासी वर्ग से आते हैं। अनुसूचित जाति वर्ग से खाद्य मंत्री दयालदास बघेल और गुरु खुशवंत साहब मंत्रिमंडल में शामिल हैं। ओबीसी वर्ग से उपमुख्यमंत्री अरुण साव, उद्योग मंत्री लखन देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े शामिल हैं। सामान्य वर्ग से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं।
क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों को आधार मानकर देखें तो रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी मंत्रिमंडल में हैं। सरगुजा लोकसभा क्षेत्र से कृषि मंत्री रामविचार नेताम, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े प्रतिनिधित्व करते हैं। कोरबा लोकसभा क्षेत्र से स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल और उद्योग मंत्री लखन देवांगन, बिलासपुर से उपमुख्यमंत्री अरुण साव, दुर्ग से खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, राजनांदगांव से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, रायपुर से राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और गुरु खुशवंत साहब तथा बस्तर लोकसभा क्षेत्र से वन मंत्री केदार कश्यप मंत्रिमंडल में शामिल हैं।
इन सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को लेकर राजनीतिक विश्लेषण में कुछ असंतुलन की बात कही जा रही है। मौजूदा मंत्रिमंडल में ओबीसी वर्ग से सात मंत्री हैं, जबकि सामान्य वर्ग से दो मंत्री हैं। वहीं अल्पसंख्यक वर्ग को फिलहाल मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। राजनीतिक चर्चा में यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व की राज्य सरकारों में अल्पसंख्यक वर्ग को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलता रहा है। ऐसे में भविष्य में सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल की संरचना में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
क्षेत्रीय समीकरण पर नजर डालें तो कांकेर और महासमुंद लोकसभा क्षेत्र से मौजूदा मंत्रिमंडल में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। ऐसे में यदि मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है तो क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए इन क्षेत्रों को भी ध्यान में रखे जाने की चर्चाएं हैं।
मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि दोनों उपमुख्यमंत्रियों की भूमिका बरकरार रह सकती है और विभागों में बदलाव किया जा सकता है। वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर रामविचार नेताम और केदार कश्यप को भी सुरक्षित माना जा रहा है। वहीं नए मंत्रियों में गुरु खुशवंत साहब, राजेश अग्रवाल और गजेन्द्र यादव के भी सामाजिक एवं क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से बने रहने की चर्चा है।
ओबीसी वर्ग से आने वाले वित्त मंत्री ओपी चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को लेकर भी फिलहाल उनकी भूमिका बरकरार रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि संभावित फेरबदल की चर्चाओं में ओबीसी वर्ग से आने वाले लखन देवांगन, टंकराम वर्मा और लक्ष्मी राजवाड़े के साथ अनुसूचित जाति वर्ग के वरिष्ठ नेता दयालदास बघेल के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि दयालदास बघेल दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से मंत्रिमंडल में अकेले प्रतिनिधि हैं और अनुसूचित जाति वर्ग के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। ऐसे में उनके मंत्रिमंडल में बने रहने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक चर्चाओं में यह संभावना भी जताई जा रही है कि यदि सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए फेरबदल किया जाता है तो ओबीसी वर्ग से मंत्रियों की संख्या सात से घटाकर चार की जा सकती है। इसके साथ सामान्य वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग और आदिवासी वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की संभावनाओं पर भी चर्चा है। ऐसी स्थिति में कोरबा और सरगुजा जैसे क्षेत्रों के मौजूदा प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है। रायपुर लोकसभा क्षेत्र से किसी मंत्री को हटाए जाने की स्थिति में महासमुंद लोकसभा क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने की संभावना भी चर्चा में है। वहीं रायपुर से अल्पसंख्यक वर्ग को प्रतिनिधित्व दिए जाने की अटकलें भी राजनीतिक गलियारों में लगाई जा रही हैं।
हालांकि साय मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इन चर्चाओं को राजनीतिक कयासों के तौर पर ही देखा जा रहा है। भाजपा संगठन, केंद्र सरकार और राज्य सरकार में संभावित बदलावों को लेकर आने वाले दिनों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। तब तक सियासी गलियारों में मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाओं और कयासों का दौर जारी है।

