Chhattisgarh Raipur News : रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसे के संरक्षण और कुनबा बढ़ाने की कवायद नए चरण में पहुंच गई है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में असम से वन भैंसे लाने के बजाय बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य से तीन मादा वन भैंसों को लाने की तैयारी है। इन्हें उदंती-सीतानदी में मौजूद एकमात्र नर वन भैंसा ‘छोटू’ के साथ रखा जाएगा।
उदंती-सीतानदी में मौजूद ‘छोटू’ को छत्तीसगढ़ का मूल वन भैंसा माना जाता है। करीब 25 वर्ष की उम्र के इस नर वन भैंसे पर अब प्रजाति के संरक्षण और विस्तार की बड़ी उम्मीद टिकी है। बढ़ती उम्र के बावजूद वाइल्डलाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया (डब्ल्यूटीआइ) के विज्ञानियों ने स्वास्थ्य जांच के बाद उसे प्रजनन के लिए फिट पाया है। ऐसे में बारनवापारा से मादा वन भैंसों को उदंती लाकर प्रजनन कराने की योजना बनाई गई है।
वर्ष 2023 में वन भैंसों की संख्या बढ़ाने और संरक्षण के उद्देश्य से असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से छह वन भैंसों को छत्तीसगढ़ लाकर बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में रखा गया था। संरक्षण और प्रजनन के प्रयासों के बाद बारनवापारा में इनकी संख्या बढ़कर 13 हो गई है। इसी बढ़ी संख्या के आधार पर अब तीन मादा वन भैंसों को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने की तैयारी है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि कुछ कारणों से असम से लाए गए वन भैंसों को पहले बारनवापारा में रखा गया था। उस समय भी योजना थी कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर बारनवापारा से वन भैंसों को उदंती-सीतानदी में स्थानांतरित किया जाएगा। अब इसी योजना के तहत तीन मादा वन भैंसों को उदंती लाने की तैयारी की जा रही है।
वन भैंसों की संख्या बढ़ाने के साथ उनके प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने पर भी वन विभाग काम कर रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों और विभाग की ओर से आवास विकास, शिकार विरोधी उपाय और लगातार निगरानी की जा रही है। बारनवापारा में बढ़े कुनबे से तीन मादा वन भैंसों को उदंती भेजे जाने से छत्तीसगढ़ में इस राजकीय पशु के संरक्षण अभियान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

