रायपुर। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। करीब 15 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से रायपुर और भोपाल के बीच 6 लेन इंटर-स्टेट ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित किया गया है। इस कॉरिडोर के निर्माण से दोनों राज्यों के बीच यात्री आवागमन, माल परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
भोपाल से रायपुर तक जुड़ेगा लंबा कॉरिडोर
प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे मध्यप्रदेश के भोपाल, सागर, दमोह, जबलपुर और मंडला जैसे प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। इसके बाद यह छत्तीसगढ़ में प्रवेश करते हुए कवर्धा, बेमेतरा और सिमगा के रास्ते राजधानी रायपुर से जुड़ेगा। इस परियोजना के जरिए दोनों राज्यों के कई महत्वपूर्ण शहरों और जिलों को तेज सड़क नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।
सांसद संतोष पाण्डेय ने किया स्वागत
सांसद संतोष पाण्डेय ने रायपुर-भोपाल 6 लेन इंटर-स्टेट ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की केंद्र सरकार की पहल का स्वागत किया है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना बताते हुए कहा कि बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से व्यापार, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
14-15 घंटे का सफर 6-7 घंटे में होने का दावा
प्रस्तावित कॉरिडोर के पूरा होने के बाद भोपाल से रायपुर का सफर करीब 14-15 घंटे से घटकर 6-7 घंटे तक आने की उम्मीद जताई जा रही है। नए भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को जबलपुर-मंडला होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा से जोड़ने की योजना है। इससे मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा।
माल परिवहन और कारोबार को मिलेगा फायदा
6 लेन एक्सप्रेस-वे बनने से दोनों राज्यों के बीच माल परिवहन अधिक सुगम होने की संभावना है। औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सड़क संपर्क मिलने से लॉजिस्टिक्स व्यवस्था मजबूत हो सकती है। साथ ही परिवहन समय और लागत में कमी आने से व्यापारिक गतिविधियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
चिल्फी घाट होते हुए रायपुर तक 6 लेन सड़क
प्रस्ताव के तहत जबलपुर से छत्तीसगढ़ सीमा और चिल्फी घाट होते हुए रायपुर तक जाने वाले मार्ग को भी 6 लेन एक्सप्रेस-वे में विकसित करने की योजना बताई गई है। इसके लिए करीब 2500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है। यह मार्ग मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच महत्वपूर्ण व्यापारिक रूट के रूप में देखा जाता है। प्रस्तावित सड़क पर वाहनों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने की बात कही गई है।
पर्यटन को भी मिलेगा बड़ा फायदा
इस कॉरिडोर से पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क के चलते छत्तीसगढ़ से आने वाले पर्यटकों के लिए मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान हो सकता है। वहीं राज्य सरकार के करीब 5500 करोड़ रुपये के टाइगर कॉरिडोर के जरिए कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना टाइगर रिजर्व को जोड़ने की योजना के साथ यह सड़क नेटवर्क पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
रायपुर-भोपाल एक्सप्रेस-वे के निर्माण से दोनों राज्यों के बीच सड़क संपर्क, व्यापार, परिवहन और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की अंतिम लागत, विस्तृत रूट और निर्माण की समयसीमा से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।

