Chhattisgarh Sakti News: सक्ती। ग्राम पंचायत रनपोटा में शासकीय आंगनबाड़ी भवन को बिना अनुमति और पंचायत प्रस्ताव के कथित तौर पर ध्वस्त कर जमीन बेचने के प्रयास का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने सरपंच भारती साहू पर पद के दुरुपयोग और शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार से लिखित शिकायत कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बिना अनुमति आंगनबाड़ी भवन तोड़ने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत रनपोटा में स्थित शासकीय आंगनबाड़ी भवन क्रमांक-1 को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया गया। भवन तोड़ने से पहले न तो ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पारित किया गया और न ही संबंधित महिला एवं बाल विकास विभाग अथवा राजस्व विभाग से अनुमति ली गई। ग्रामीणों का दावा है कि बिना पूर्व सूचना के शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
शासकीय जमीन को निजी व्यक्ति को देने का आरोप
शिकायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आंगनबाड़ी भवन की जमीन का लाभ एक निजी व्यक्ति को पहुंचाने के उद्देश्य से भवन को हटाया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, उक्त जमीन को लक्ष्मीन चौहान नामक व्यक्ति को देने का प्रयास किया जा रहा है, जो रनपोटा का निवासी नहीं है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि शासकीय जमीन का कथित तौर पर 3 लाख रुपये में सौदा किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग
शासकीय भवन को ध्वस्त किए जाने और जमीन के कथित सौदे की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की संपत्ति और भूमि से जुड़े किसी भी निर्णय के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
एसडीएम बोले- बिना अनुमति भवन तोड़ा तो होगी कार्रवाई
मामले में मालखरौदा एसडीएम रूपेंद्र पटेल ने कहा कि उनके द्वारा ग्राम पंचायत रनपोटा में आंगनबाड़ी भवन तोड़ने की कोई अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि सरपंच द्वारा बिना अनुमति भवन तोड़ा गया है या शासकीय जमीन को बेचने का प्रयास किया गया है, तो यह पूरी तरह गलत है। मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आंगनबाड़ी भवन किस अनुमति के आधार पर ध्वस्त किया गया और जमीन को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

