Bilaspur News: कोनी में मियावाकी तकनीक से विकसित होगा घना जंगल, एसईसीएल लगाएगा 15 हजार देसी पौधे

Bilaspur News: कोनी में मियावाकी तकनीक से विकसित होगा घना जंगल, एसईसीएल लगाएगा 15 हजार देसी पौधे

Chhattisgarh Bilaspur News: बिलासपुर। शहर के कोनी स्थित कमिश्नर कार्यालय के पीछे अरपा नदी तट क्षेत्र को घने हरित वन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सोमवार को मियावाकी तकनीक आधारित वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया गया। संभागायुक्त सुनील जैन और एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन ने नारियल, आम और नीम के पौधे लगाकर अभियान की शुरुआत की।

एसईसीएल की ओर से इस क्षेत्र में विभिन्न देसी प्रजातियों के 15 हजार पौधे लगाए जाएंगे। अभियान के पहले चरण में करीब 1,000 पौधों का रोपण किया गया। मियावाकी तकनीक के तहत कम स्थान में सघन रूप से पौधे लगाए जाते हैं, जो सामान्य पद्धति की तुलना में कहीं अधिक तेजी से विकसित होकर कुछ ही वर्षों में घने जंगल का स्वरूप ले लेते हैं।

संभागायुक्त सुनील जैन ने कहा कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह विशेष पहल की गई है।

एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत कोल इंडिया परिवार ने 21 जुलाई को देशभर में एक साथ लाखों पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। इसी अभियान के तहत अकेले एसईसीएल द्वारा 3 लाख पौधों का रोपण किया जा रहा है।

कार्यक्रम में एसईसीएल के निदेशक (एचआर) बिरंची दास, निदेशक (तकनीकी, योजना एवं परियोजना) रमेश चंद्र महापात्र सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी उत्साहपूर्वक पौधरोपण किया।

निदेशक रमेश चंद्र महापात्र ने कहा कि बढ़ती आबादी के बीच कोनी क्षेत्र में एक सुरक्षित, हरित और प्राकृतिक वातावरण विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। मियावाकी पद्धति से लगाए जा रहे फलदार, औषधीय और छायादार देसी पौधे तेजी से विकसित होंगे और आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल देंगे।


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