Jabalpur News: जबलपुर। मध्य प्रदेश में लंबे समय से चर्चा में रहे ‘प्रमोशन में आरक्षण’ मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया है। अब इस संवेदनशील प्रकरण की सुनवाई के लिए नई विशेष (स्पेशल) बेंच का गठन किया जाएगा। साथ ही हाईकोर्ट ने फिलहाल कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की अंतरिम या अंतिम राहत देने से इनकार कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, जस्टिस विवेक रूसिया ने निष्पक्षता के सिद्धांत का पालन करते हुए यह फैसला लिया है। दरअसल, न्यायाधीश बनने से पहले वह इस विवाद से जुड़े ‘आर.बी. राय’ मामले में बतौर वकील पैरवी कर चुके थे और कोर्ट रिकॉर्ड में उनका वकालतनामा दर्ज है। इसी कारण उन्होंने इस केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
यह मामला उस समय और पेचीदा हो गया, जब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा पदोन्नत होकर सुप्रीम कोर्ट चले गए। इससे पहले 17 फरवरी को इस मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी हो चुकी थी, लेकिन फैसला आने से पहले ही न्यायिक स्थिति बदल गई। अब पूरे मामले की सुनवाई नई विशेष बेंच करेगी।
हाईकोर्ट ने फिलहाल किसी भी तरह की अंतरिम या अंतिम राहत देने से इनकार किया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में आरक्षण संबंधी नियम निरस्त होने के बाद से प्रदेश में नियमित पदोन्नतियां और कई नई नियुक्तियां प्रभावित हैं। मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण हजारों शासकीय कर्मचारियों के प्रमोशन अटके हुए हैं।
इस विवाद का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई सरकारी विभागों में वरिष्ठ पद खाली होने या प्रभार के भरोसे संचालित होने से प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। अब प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की निगाहें हाईकोर्ट द्वारा गठित नई विशेष बेंच और उसके फैसले पर टिकी हैं।

