CG News: राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर भूपेश बघेल का हमला, बोले- मैंने भी दिए थे 1.21 लाख रुपये, दान का हिसाब सार्वजनिक किया जाए

CG News: राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर भूपेश बघेल का हमला, बोले- मैंने भी दिए थे 1.21 लाख रुपये, दान का हिसाब सार्वजनिक किया जाए

Chhattisgarh News: रायपुर। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर देशभर में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर सवाल उठा रही है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने भी भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर निशाना साधते हुए दान और मंदिर निर्माण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग की।

रामशिला अभियान के चंदे का हिसाब मांगा

भूपेश बघेल ने कहा कि रामशिला पूजा अभियान के दौरान भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ता देशभर के गांव-गांव जाकर चंदा एकत्रित कर रहे थे, लेकिन उस राशि का आज तक सार्वजनिक हिसाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब राम मंदिर निर्माण शुरू हुआ, तब भी देशभर के लोगों ने श्रद्धापूर्वक दान दिया। छत्तीसगढ़ के लाखों लोगों ने भी करोड़ों रुपये का योगदान दिया है।

‘मैंने भी 1.21 लाख रुपये का दान दिया’

भूपेश बघेल ने कहा कि विधानसभा में उनसे पूछा गया था कि क्या उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए दान दिया था। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं 1 लाख 21 हजार रुपये का दान दिया था। उन्होंने कहा कि उनकी तरह लाखों लोगों ने आस्था के साथ मंदिर निर्माण में सहयोग किया है, इसलिए पूरे मामले पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए।

भाजपा, आरएसएस और विहिप पर लगाए आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं और निर्माण कार्य में 40 प्रतिशत कमीशन लिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। उन्होंने भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर निशाना साधते हुए कहा कि धार्मिक दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में किसी की संलिप्तता है तो यह आस्था के साथ विश्वासघात है।

राम मंदिर ट्रस्ट में हुए बदलाव

उधर, राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में कथित अनियमितताओं को लेकर कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। 6 जुलाई को आयोजित राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए, जबकि सदस्य गोपाल राव को ट्रस्ट से हटा दिया गया। साथ ही सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का नया कार्यकारी महासचिव नियुक्त किया गया। अब वह चंपत राय के स्थान पर ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।


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