Bhilai News: BSP लौह स्क्रैप चोरी मामला: GM और AGM गिरफ्तार, 15 तक पहुंची आरोपियों की संख्या

Bhilai News: BSP लौह स्क्रैप चोरी मामला: GM और AGM गिरफ्तार, 15 तक पहुंची आरोपियों की संख्या

CG Bhilai News: भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में फ्लू डस्ट की आड़ में लौह स्क्रैप चोरी के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्लांट के दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। गुरुवार को पुलिस ने बीएसपी के जनरल मैनेजर (GM) हिमांशु भूषण मलिक (54) और असिस्टेंट जनरल मैनेजर (AGM) मनोज कुमार देवांगन (58) को गिरफ्तार किया। दोनों पर चोरी के नेटवर्क को प्लांट के भीतर से सहयोग देने का आरोप है।

पुलिस जांच के अनुसार, दोनों अधिकारी कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड संजय सिंह के लगातार संपर्क में थे। हालांकि, उन्होंने किस प्रकार से गिरोह की मदद की, इसकी विस्तृत जांच अभी जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और फरार आरोपियों की तलाश भी जारी है। अब तक इस प्रकरण में 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

फ्लू डस्ट में मिलाकर बाहर भेजा जाता था स्क्रैप

जांच में सामने आया है कि बीएसपी से निकलने वाले फ्लू डस्ट में लौह स्क्रैप मिलाकर उसे प्लांट से बाहर भेजा जाता था। इसके बाद यह स्क्रैप एके ट्रेडर्स में जमा किया जाता था। पुलिस पूरे नेटवर्क, सप्लाई चेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

26 मई को हुआ था बड़े रैकेट का खुलासा

इस मामले का खुलासा 26 मई 2026 को हुआ था, जब पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स और हथखोज के प्लॉट नंबर-18 में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान कई हाईवा, ट्रक और अन्य वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री बरामद की गई थी।

पुलिस ने मौके से करीब 250 टन लौह स्क्रैप जब्त किया था। इसके अलावा स्क्रैप की ढुलाई और लोडिंग में इस्तेमाल होने वाले ट्रक, हाईवा, जेसीबी, हाईड्रा सहित कई मशीनें भी जब्त की गई थीं। जब्त स्क्रैप, वाहनों और मशीनों की कुल कीमत करीब 3 करोड़ 22 लाख रुपये आंकी गई थी, जिसमें लगभग 90 लाख रुपये का लौह स्क्रैप शामिल था।

राजनीतिक मुद्दा बना मामला

लौह स्क्रैप चोरी का मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन लगातार इस प्रकरण को उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं स्थानीय विधायक और सांसद की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामले के मुख्य सरगना को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जबकि पूरे प्रकरण की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग भी तेज हो गई है।


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