Bhopal News: भोपाल। मध्यप्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र (Caste Certificate) को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। इस मामले में सोमवार सुबह 11 बजे राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी उच्च स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होंगी। समिति उनके अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र से जुड़े सभी दस्तावेजों और अभिलेखों की विस्तार से जांच करेगी। यह पूरी प्रक्रिया मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर की जा रही है, जिसके चलते इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई
प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रशासन ने उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। अब इसी क्रम में राज्य मंत्री को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने पक्ष और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया है।
मायके और ससुराल में कराई गई मुनादी
जांच प्रक्रिया के तहत प्रशासन ने प्रतिमा बागरी के मायके और ससुराल दोनों स्थानों पर मुनादी भी कराई है। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों से आवश्यक जानकारी जुटाना और यदि किसी व्यक्ति के पास मामले से संबंधित कोई तथ्य या साक्ष्य हों तो उन्हें जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर देना है। इस कदम को जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस ने चुनाव के दौरान उठाए थे सवाल
राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठाती रही है। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने विधानसभा चुनाव के दौरान ही आरोप लगाया था कि प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र नियमों के अनुरूप नहीं है और इसे गलत तथ्यों के आधार पर प्राप्त किया गया है। कांग्रेस ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए इसे गंभीर संवैधानिक विषय बताया था।
दस्तावेजों की होगी गहन जांच
सूत्रों के अनुसार, जांच समिति प्रतिमा बागरी द्वारा प्रस्तुत सभी प्रमाण पत्रों, पारिवारिक अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण करेगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और संबंधित सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
इस पूरे मामले ने मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि जांच पूरी तरह कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार हो रही है। अब सभी की नजरें जांच समिति की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

