Chhattisgarh Latest News: रायपुर। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने सामुदायिक पुलिसिंग और जनसहभागिता को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पुलिस ट्रांजिट मेस में सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों का गरिमामय सम्मेलन आयोजित किया। कार्यक्रम में 125 से अधिक सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए तथा अपने लंबे सेवा अनुभवों को साझा किया।
सम्मेलन का उद्देश्य केवल औपचारिक संवाद तक सीमित नहीं था, बल्कि पुलिस विभाग में वर्षों तक सेवाएं दे चुके अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों के ज्ञान, मार्गदर्शन एवं सामाजिक सहभागिता को समाजहित में पुनः जोड़ना भी था। इस पहल को सुरक्षित, जागरूक और अनुशासित समाज के निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी अपने जीवन के लगभग चार दशक विभाग और समाज की सेवा में समर्पित करते हैं। उनका अनुभव और सामाजिक समझ आज भी समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था में सुधार, नशा उन्मूलन, सामाजिक जागरूकता, युवाओं को मार्गदर्शन तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे क्षेत्रों में सेवानिवृत्त अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सम्मेलन में उपस्थित सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पुलिस विभाग एवं समाज के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस दौरान जानकारी दी गई कि निरीक्षक से लेकर आरक्षक स्तर तक रिटायर्ड वेलफेयर यूनियन के अंतर्गत लगभग 110 सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों का पंजीयन किया जा चुका है। यूनियन द्वारा समय-समय पर विभिन्न बैठकों और सामाजिक गतिविधियों का आयोजन भी किया जाता रहा है।
कार्यक्रम में सभी सदस्यों ने शासन की मंशा के अनुरूप समाज में शांति, कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में सक्रिय सहयोग देने का भरोसा दिलाया। सम्मेलन के दौरान इस माह रायपुर कमिश्नरेट से सेवानिवृत्त हुए पांच पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को सम्मानित कर उनके दीर्घकालिक योगदान को आदरपूर्वक सराहा गया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अमित तुकाराम कांबले, पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त डॉ. अर्चना झा, सहायक पुलिस कमिश्नर निलेश द्विवेदी, रक्षित निरीक्षक अनीष सारथी सहित पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की यह पहल पुलिस परिवार और समाज के बीच विश्वास, सहभागिता और जिम्मेदारी की भावना को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

