Chhattisgarh High Court News: बिलासपुर। भीषण गर्मी और संसाधनों की बचत को ध्यान में रखते हुए ने अपने कामकाज में बड़े बदलाव किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद हाईकोर्ट ने समर वेकेशन के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करने का फैसला लिया है। इस संबंध में चीफ जस्टिस के निर्देश पर सर्कुलर जारी किया गया है।
वकीलों और पक्षकारों को मिलेगी राहत
नई व्यवस्था के तहत गर्मी के दौरान वकीलों और पक्षकारों को कोर्ट परिसर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, जो वकील किसी कारणवश वर्चुअल माध्यम से नहीं जुड़ पाएंगे, उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने की अनुमति दी जाएगी।
जरूरत पड़ने पर अदालत स्वयं भी किसी मामले में फिजिकल सुनवाई के निर्देश जारी कर सकेगी।
कर्मचारियों को मिल सकती है वर्क फ्रॉम होम सुविधा
हाईकोर्ट और जिला अदालतों के कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हालांकि, रोटेशन व्यवस्था के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कम से कम 50 प्रतिशत कर्मचारी कार्यालय में उपस्थित रहें, ताकि न्यायिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों।
घर से काम करने वाले कर्मचारियों को फोन और अन्य सरकारी संचार माध्यमों पर हर समय उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा।
फ्यूल बचाने के लिए लागू होगी कार पूलिंग
ईंधन की बचत और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए हाईकोर्ट ने व्हीकल पूलिंग यानी साझा वाहन व्यवस्था लागू करने की पहल की है। इसके तहत न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री अफसरों और मंत्रालयीन कर्मचारियों को कार पूलिंग अपनाने के लिए कहा गया है।
इतना ही नहीं, हाईकोर्ट के जजों से भी आपस में कार पूलिंग करने का आग्रह किया गया है।
रजिस्ट्री को तकनीकी तैयारी के निर्देश
इन व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से लागू करने के लिए हाईकोर्ट रजिस्ट्री के अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समेत अन्य जरूरी तकनीकी इंतजाम दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट प्रशासन का कहना है कि चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तकनीक, समन्वय और संस्थागत जिम्मेदारी के जरिए आम जनता को सुगम न्याय उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रशासन के मुताबिक यह कदम देशहित, संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

