Chhattisgarh Surajpur News: सूरजपुर। सरकारी सिस्टम में रसूखदार अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच किस तरह फाइलों में दबकर रह जाती है, इसका ताजा उदाहरण सरगुजा संभाग में सामने आया है। तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर (सरगुजा) जगन्नाथ वर्मा के खिलाफ लंबित शिकायत की जांच रिपोर्ट अब तक सूरजपुर कलेक्ट्रेट से नहीं भेजी गई है, जबकि संभागायुक्त कार्यालय पिछले एक साल से लगातार पत्राचार कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक, संभागायुक्त कार्यालय ने जून 2023 से जुलाई 2024 के बीच चार बार पत्र भेजकर जांच प्रतिवेदन मांगा, लेकिन सूरजपुर कलेक्ट्रेट की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया। प्रशासनिक गलियारों में इसे गंभीर लापरवाही के साथ-साथ मामले को दबाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
चार रिमाइंडर के बाद भी कार्रवाई शून्य
तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर जगन्नाथ वर्मा के खिलाफ प्राप्त शिकायत की जांच की जिम्मेदारी सूरजपुर कलेक्ट्रेट को सौंपी गई थी। लेकिन 06 जून 2023 से शुरू हुआ पत्राचार अब तक केवल कागजों में ही सीमित है। एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी।
कमिश्नर कार्यालय का सख्त स्मरण पत्र
हाल ही में संभागायुक्त कार्यालय द्वारा जारी स्मरण पत्र में कलेक्टर सूरजपुर को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि मामले में और विलंब न किया जाए। पत्र में कहा गया है-
“वांछित प्रतिवेदन अतिशीघ्र इस कार्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जा सके।”
सूत्रों के अनुसार, कमिश्नर कार्यालय ने इस बार कड़े और अंतिम चेतावनी भरे लहजे में प्रतिवेदन मांगा है।
प्रशासनिक कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
लगातार चार रिमाइंडर के बाद भी रिपोर्ट नहीं भेजे जाने से सूरजपुर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि संभागायुक्त की सख्ती के बाद प्रशासन सक्रिय होता है या फिर रसूख और दबाव के चलते यह फाइल आगे भी ठंडे बस्ते में पड़ी रहती है।

