कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, मध्य प्रदेश सरकार को लगाई फटकार

कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, मध्य प्रदेश सरकार को लगाई फटकार

नईदिल्ली। कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, अब बहुत हो गया और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति देने पर चार सप्ताह के भीतर फैसला लिया जाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मंत्री का बयान दुर्भाग्यपूर्ण था और उन्होंने बाद में माफी भी मांग ली थी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बयान था। अदालत ने यह भी कहा कि मंत्री के व्यवहार में वास्तविक पछतावा नजर नहीं आता।

राज्य सरकार को कार्रवाई का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और विजय शाह की ओर से आगे की दलीलें सुनने से इनकार करते हुए कहा कि पहले उसके पूर्व आदेश का पालन किया जाए। अदालत ने याद दिलाया कि जनवरी में दिए गए आदेश के तहत सरकार को दो सप्ताह के भीतर अभियोजन की अनुमति पर फैसला लेना था, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। मामले की अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद होगी।

एसआईटी अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने बताया कि विशेष जांच दल (SIT) अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि वह विजय शाह का बचाव नहीं कर रहे हैं, लेकिन संभव है कि मंत्री कर्नल सोफिया कुरैशी की सराहना करना चाहते थे और अपनी बात सही ढंग से नहीं रख पाए।

कोर्ट की टिप्पणी, गलती थी तो तुरंत माफी मांगते
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को बोलना अच्छी तरह आता है। यदि यह वास्तव में जुबान फिसलने का मामला होता, तो तुरंत स्पष्ट और बिना शर्त माफी दी जाती। विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने दलील दी कि मंत्री ने तुरंत सार्वजनिक माफी जारी कर दी थी।
हालांकि अदालत ने दोहराया कि अब यह राज्य सरकार को तय करना है कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाए या नहीं।

अभियोजन की अनुमति राज्य सरकार से मिलना आवश्यक
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि SIT अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट सौंप चुकी है। लेकिन आगे की कार्रवाई इसलिए रुकी हुई है क्योंकि भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत अभियोजन की अनुमति राज्य सरकार से मिलना आवश्यक है।

हाई कोर्ट ने भी जताई थी नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने SIT की सीलबंद रिपोर्ट का भी अवलोकन किया, जिसमें विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने SIT को विजय शाह से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी भी जुटाने के निर्देश दिए थे।

इससे पहले जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाते हुए कहा था कि वह अदालत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। अदालत ने उनके आचरण पर सवाल उठाते हुए उनकी मंशा पर भी चिंता जताई थी।


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