Chhattisgarh Latest News: रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के वन विभाग अंतर्गत छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा खस की सुगंधित जड़ों से शिल्प कला कृतियां बनाने का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 25-26 अप्रैल 2026 को बोर्ड कार्यालय सभागार में आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य धमतरी जिले में खस की खेती कर रही महिला स्व सहायता समूहों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना है।
प्रशिक्षण में कुरूद ब्लॉक के तीन गांवों-नारी, परखंदा और मदरौद-की चार महिला स्व सहायता समूहों की सदस्याओं ने भाग लिया। इनमें अन्नपूर्णा और जय माँ सरस्वती समूह (ग्राम नारी), धान का कटोरा उत्पादन समिति (ग्राम परखंदा) और वंदना महिला स्व सहायता समूह (ग्राम मदरौद) शामिल रहे।
तमिलनाडु से आए विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण
खस की जड़ों से शिल्प निर्माण का प्रशिक्षण देने के लिए मदुरै से मुख्य प्रशिक्षक निर्मला और शन्बगम को आमंत्रित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को खस से माला, तोरण, हाथ पंखा सहित सात प्रकार की कलाकृतियां बनाना सिखाया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है मॉडल
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने प्रतिभागी महिलाओं से संवाद कर उनकी बनाई कलाकृतियों का अवलोकन किया। उन्होंने बताया कि धमतरी में नदी किनारे खस की खेती का मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो चुका है और इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी विस्तार देने की योजना बनाई जा रही है।
वहीं बोर्ड के सीईओ जे.ए.सी.एस. राव ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 में बस्तर क्षेत्र की शबरी और इंद्रावती नदियों के किनारे भी इस मॉडल पर कार्य शुरू किया जा रहा है।
बाजार में खस उत्पादों की अच्छी मांग
मुख्य प्रशिक्षक निर्मला ने बताया कि खस से बने उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है। खस की माला लगभग 500 रुपये, तोरण 300 रुपये और अन्य छोटे उत्पाद 200 से 500 रुपये तक आसानी से बिकते हैं। इन उत्पादों की खूबसूरती के साथ उनकी प्राकृतिक सुगंध भी विशेष आकर्षण होती है।
महिलाओं में उत्साह, आत्मनिर्भरता की ओर कदम
प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कहा कि बोर्ड द्वारा किए जा रहे प्रयास उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित हो रहे हैं।
कार्यक्रम में औषधीय पौधों के सलाहकार डी.के.एस. चौहान और जिला को-ऑर्डिनेटर फकीर राम कोसरिया भी उपस्थित रहे।

