महिला आरक्षण पर राजनीति तेज: कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया “2029 तक टालने” का आरोप

महिला आरक्षण पर राजनीति तेज: कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया “2029 तक टालने” का आरोप

Chhattisgarh Durg News: दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी की महामंत्री निकिता मिलिंद ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर महिला आरक्षण को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है।

निकिता मिलिंद ने कहा कि भाजपा ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का दावा तो किया, लेकिन इसे जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़कर 2029 तक टालने की योजना बनाई है। उनके मुताबिक, “अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में से करीब 180 सीटें महिलाओं को तुरंत दी जा सकती थीं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा न करने के पीछे राजनीतिक कारण हैं, क्योंकि इससे कई मौजूदा नेताओं की सीटें प्रभावित होतीं और पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ सकता था।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का तरीका “राजनीतिक संतुलन साधने” की रणनीति है, न कि वास्तविक सशक्तिकरण।

पंचायत स्तर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कई जगहों पर महिला प्रतिनिधि चुनी जाती हैं, लेकिन निर्णय उनके परिजन लेते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यही मॉडल संसद तक पहुंच सकता है, जहां “महिला के नाम पर पुरुषों द्वारा सत्ता संचालन” देखने को मिल सकता है।

महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि कई मामलों में न्याय और सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं, जबकि सरकार “नारी शक्ति” की बात करती रही है।

इसके अलावा, निकिता मिलिंद ने जनसंख्या आधारित परिसीमन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इससे दक्षिणी राज्यों की तुलना में उत्तर भारत के राज्यों को अधिक सीटें मिल सकती हैं, जिससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित होगा।

उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि यह पूरा मामला महिला सशक्तिकरण से ज्यादा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नजर आता है और जनता को इसके पीछे की वास्तविकता समझनी चाहिए।


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