छत्तीसगढ़ महिला आयोग ने की जनसुनवाई, मातृत्व अवकाश और भरण-पोषण से जुड़े 5 से ज्यादा मामलों की सुनवाई की

छत्तीसगढ़ महिला आयोग ने की जनसुनवाई, मातृत्व अवकाश और भरण-पोषण से जुड़े 5 से ज्यादा मामलों की सुनवाई की

CG Mahila Aayog Jan Sunvai रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य सरला कोसरिया ने आज रायपुर कार्यालय में महिला उत्पीड़न से जुड़े विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई की। आयोग की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर कुल 392 और रायपुर जिले में 181 वी. जनसुनवाई आयोजित की गई।

सुनवाई में मातृत्व अवकाश से लौटकर काम कर रही एक आवेदिका का वेतन रोक दिए जाने का मामला सामने आया। आयोग ने निर्देश दिया कि विभाग के उच्चाधिकारियों को पक्षकार बनाया जाए ताकि आगामी सुनवाई में मामला निराकृत किया जा सके।

एक अन्य प्रकरण में पुलिस आरक्षक द्वारा भरण-पोषण न देने और नौकरी का रौब दिखाने का मामला भी आया। आयोग ने अनावेदक को जुलाई 2025 से अब तक आवेदिका के खाते में 15 हजार रुपये प्रतिमाह जमा करने का निर्देश दिया। यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो रायपुर कमिश्नर को सेवा समाप्ति की अनुशंसा भेजी जाएगी।

कुछ मामलों में आवेदिकाओं को पारिवारिक संपत्ति पर अवैध कब्जा, बच्चों से मिलने में रोक और कार्यस्थल पर प्रताड़ना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। आयोग ने संबंधित अनावेदकों को समझाईश दी और कहा कि आवेदिकाओं के अधिकारों का उल्लंघन होने पर एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।

एक प्रकरण में आवेदिका थाना-धमधा में गर्भपात के बाद ड्यूटी करने में असमर्थ थीं, बावजूद इसके उसे ड्यूटी पर बुलाया गया और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। आयोग ने मामले की जांच एस.पी. दुर्ग से कराने का आदेश दिया और कहा कि आवेदिका की ड्यूटी उसकी सेवा और परिवार के तालमेल को ध्यान में रखते हुए नियोजित की जाएगी।

इस सुनवाई के दौरान आयोग ने महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, उनके सेवा और पारिवारिक जीवन के संतुलन पर जोर दिया और सभी मामलों में उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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