सहकारिता विभाग में ‘पावर कनेक्शन’ से भर्ती का बड़ा खेल! मंत्री के OSD और अपेक्स बैंक MD से जुड़े रिश्तेदारों को लाभ देने के आरोप

सहकारिता विभाग में ‘पावर कनेक्शन’ से भर्ती का बड़ा खेल! मंत्री के OSD और अपेक्स बैंक MD से जुड़े रिश्तेदारों को लाभ देने के आरोप

Rajnandgaon Sahkarita Vibhag Bharti Ghotala राजनांदगांव जिले में सहकारिता विभाग से जुड़ा एक मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है, जिसमें प्रभाव और पद के दुरुपयोग के आरोपों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। सामने आए दस्तावेजों और आदेशों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि प्रभावशाली पद पर बैठे अधिकारी के.एन. कोंडे से जुड़े करीबी रिश्तेदारों को नियमों को दरकिनार करते हुए नियुक्ति और प्रभार दिए गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि 1 अप्रैल 2026 को एक ही दिन में जारी दो अलग-अलग आदेशों ने इस पूरे विवाद को जन्म दिया। आदेश क्रमांक 361 के तहत शुभम कोंडे को समिति में प्रभारी प्रबंधक का पूर्ण प्रभार सौंपा गया, जबकि आदेश क्रमांक 362 के जरिए सौम्य कोंडे को लिपिक सह कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर समायोजित किया गया। दोनों आदेशों का एक ही दिन जारी होना अब संयोग से ज्यादा एक पूर्व नियोजित प्रक्रिया की ओर इशारा कर रहा है, जिस पर सवाल उठने लगे हैं।

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा के.एन. कोंडे के नाम को लेकर हो रही है, जो वर्तमान में सहकारिता मंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD) और अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। आरोप है कि उनके प्रभाव के चलते उनके करीबी रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाया गया, जिससे “पद, प्रभाव और रिश्तेदारी” के गठजोड़ की आशंका जताई जा रही है।

मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि जिस नवीन समिति में ये नियुक्तियां और प्रभार दिए गए, वह अभी पूरी तरह अस्तित्व में भी नहीं आई थी। इसके बावजूद प्रत्याशा के आधार पर नियुक्ति और जिम्मेदारी सौंप दी गई, जिसे इस प्रकार के मामलों में अभूतपूर्व बताया जा रहा है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

नियमों की अनदेखी को लेकर भी कई अहम बिंदु सामने आए हैं। सामान्य प्रक्रिया के तहत किसी भी नियुक्ति से पहले सार्वजनिक विज्ञापन, आवेदन आमंत्रण, चयन समिति का गठन, परीक्षा या साक्षात्कार और फिर अंतिम अनुमोदन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। लेकिन इस पूरे प्रकरण में इन सभी चरणों को नजरअंदाज किया गया। आरोप है कि उप आयुक्त सहकारिता, राजनांदगांव द्वारा सीधे नाम तय कर आदेश जारी कर दिए गए, जो सेवा नियम 2018 के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।

जारी दस्तावेजों में एक आदेश में प्रबंधक का प्रभार सौंपने और दूसरे में कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर समायोजन का उल्लेख है, लेकिन पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं और विभाग की भूमिका को लेकर आलोचना तेज हो गई है।

इस मामले को लेकर पुराने आरोप भी फिर से चर्चा में आ गए हैं। आरोप है कि जब के.एन. कोंडे बालोद स्थित मां दंतेश्वरी सहकारी शक्कर कारखाना मर्यादित में प्रबंध संचालक थे, तब भी कथित तौर पर अनियमित नियुक्तियां और आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।

सहकारिता विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि विभाग का मुख्य कार्य सहकारी संस्थाओं में नियमों का पालन सुनिश्चित करना होता है। इसके बावजूद इस तरह के आरोप सामने आने से यह आशंका जताई जा रही है कि व्यवस्था में प्रभाव और दबाव का असर बढ़ता जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है।

इस पूरे मामले को “पावर प्रोटेक्टेड भर्ती” के रूप में देखा जा रहा है, जहां एक ही रिश्तेदारी को लाभ मिलने, अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध होने और ऊपर से दबाव की चर्चाओं ने विवाद को और गहरा कर दिया है। ऐसे समय में जब सहकारी संस्थाएं पहले से ही अनियमितताओं से जूझ रही हैं, इस तरह की नियुक्तियां भविष्य में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकती हैं।

मामले के सामने आने के बाद आम लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है और उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि सभी नियुक्तियों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच कर पाएगी या फिर प्रभाव के चलते यह मामला दबा दिया जाएगा। यह प्रकरण न केवल एक नियुक्ति विवाद बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त प्रभाव, सिफारिश और संभावित भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर करता नजर आ रहा है।

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