मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों का सम्मेलन:सीएम बोले- जनता के बीच विनम्र होना जरूरी

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों का सम्मेलन:सीएम बोले- जनता के बीच विनम्र होना जरूरी

Yuva Vidhayak Sammelan: भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायक सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हो गई है, जिसमें तीन राज्यों के 45 विधायक भाग ले रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवा जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए राजनीति में विनम्रता, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की सीख दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए विनम्र होना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपने क्षेत्र की खूबियों के साथ-साथ कमजोरियों को भी समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत की ओर देख रही है और देश 2047 के ‘अमृत काल’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि आज देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अन्य देश भारत से लोकतंत्र सीख रहे हैं।

सम्मेलन में वासुदेव देवनानी, कैलाश विजयवर्गीय और उमंग सिंघार भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक लोक नृत्य से हुई, जिसके बाद सभी जनप्रतिनिधियों ने समूह फोटो खिंचवाया।

दो दिवसीय इस सम्मेलन में कुल पांच सत्र आयोजित होंगे। पहले दिन तीन सत्र रखे गए हैं, जिनमें लोकतंत्र में नागरिक भागीदारी को मजबूत करने और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन में युवा विधायकों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य और आत्मअनुशासन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यस्त दिनचर्या के बावजूद स्वाध्याय और व्यायाम के लिए समय निकालना चाहिए, क्योंकि “पहला सुख निरोगी काया” है।

परिवार और राजनीति के संतुलन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन का नकारात्मक प्रभाव परिवार पर नहीं पड़ना चाहिए। साथ ही उन्होंने पार्टी के प्रति निष्ठा बनाए रखने और कठिन समय में भी संगठन के साथ खड़े रहने की सलाह दी।

अपने संबोधन में उन्होंने भगवान राम और विक्रमादित्य का उदाहरण देते हुए कहा कि पद और प्रतिष्ठा परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं, इसलिए योग्यता और धैर्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान और अफगानिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति कमजोर हुई है, जबकि भारत लगातार मजबूत लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ आगे बढ़ रहा है।


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