फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर चरणदास महंत का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग को पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक की मांग

फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर चरणदास महंत का बड़ा आरोप, चुनाव आयोग को पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद फॉर्म-7 के कथित सुनियोजित दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

डॉ. महंत ने पत्र में उल्लेख किया कि वर्ष 2025 में मतदाता सूची की शुद्धता के लिए SIR प्रक्रिया शुरू की गई थी, जो लोकतंत्र के हित में एक सकारात्मक कदम हो सकता था। लेकिन इसके बाद मताधिकार पर योजनाबद्ध तरीके से हमला किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि SIR पूरा होने के बावजूद राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में वर्षों से मतदान कर रहे हजारों नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का भय बना हुआ है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक बैठकों में ऐसे मतदाताओं की पहचान कर उनके नाम फॉर्म-7 के माध्यम से कटवाने की रणनीति बनाई गई है, जो सत्तारूढ़ दल के समर्थक नहीं हैं।

डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति द्वारा एक साथ कई फॉर्म भरकर बूथ स्तर पर सैकड़ों नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया बिना पर्याप्त सत्यापन के की जा रही है, जो मतदाता सूची की “सफाई” नहीं बल्कि “सफाया” प्रतीत होती है।

नेता प्रतिपक्ष ने इसे संविधान के अनुच्छेद 326 के सार्वभौमिक मताधिकार पर सीधा हमला, लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करने वाला कदम और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव को नुकसान पहुंचाने वाला गंभीर मामला है।

डॉ. चरणदास महंत ने भारत निर्वाचन आयोग से मांग की है कि फॉर्म-7 के आधार पर चल रही इस लक्षित प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही वर्ष 2003 या उससे पूर्व से निरंतर मतदान कर रहे मतदाताओं के नाम संदेह के आधार पर हटाने की कार्रवाई बंद की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि किसी भी आवेदन को स्वीकार करने से पहले आवेदनकर्ता की पहचान, कारण और साक्ष्यों की विधिवत जांच अनिवार्य की जाए।

इसके अलावा उन्होंने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में निगरानी और ऑडिट टीम गठित कर मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और इसकी सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने की भी मांग की।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र चुपचाप नाम काटने से नहीं चलता। यदि मतदाताओं को डराकर या उलझाकर उनके अधिकार छीने गए, तो आने वाले समय में चुनाव की निष्पक्षता और जनादेश की पवित्रता दोनों पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। उन्होंने निर्वाचन आयोग से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

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