Ratlam Latest news: रतलाम। रतलाम शहर में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और बैंक प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर साइबर ठगी के मामलों में काल, लिंक या ओटीपी साझा करने जैसी बातें सामने आती हैं, लेकिन इस मामले में बिना किसी काल और जानकारी साझा किए ही राजस्व विभाग में पदस्थ एक पटवारी के खाते से करीब 2.93 लाख रुपये निकाल लिए गए।
जानकारी के अनुसार काटजू नगर निवासी अशोक कुमार योगी राजस्व विभाग में पटवारी हैं। योगी ने मार्च माह में पारिवारिक आवश्यकताओं के लिए अपने जीपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) खाते से पांच लाख रुपये निकाले थे। यह राशि उनके एसबीआई कलेक्ट्रेट शाखा स्थित खाते में जमा थी। इसी खाते से अज्ञात साइबर ठगों ने तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से रकम पार कर दी।
बैंक बैलेंस चेक किया तब पता चला रुपये निकल गए हैं
पुलिस के अनुसार 27 अप्रैल को खाते से 98 हजार रुपये निकाले गए। इसके बाद 28 अप्रैल को 97 हजार 1 रुपये तथा 29 अप्रैल को पुनः 98 हजार रुपये ट्रांसफर कर लिए गए। इस तरह कुल 2 लाख 93 हजार 1 रुपये खाते से निकल गए। पीड़ित योगी ने पुलिस को बताया कि ठगी के दौरान उनके पास न तो कोई कॉल आया और न ही उन्होंने किसी को बैंक संबंधी जानकारी या ओटीपी साझा किया।
30 अप्रैल को जब उन्होंने बैंक बैलेंस चेक किया तब खाते से राशि निकलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। औद्योगिक थाने पर पदस्थ एसआई देवीलाल पाटीदार ने बताया कि पीड़ित ने 1930 पर शिकायत की थी। मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उन खातों और माध्यमों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें यह राशि ट्रांसफर की गई।
सप्ताहभर रुकने के बाद निकालते हैं रुपये
साइबर सेल प्रभारी जीवन बारीया ने बताया कि बिना किसी मानवीय चूक के खाते से रकम निकलना तकनीकी हैकिंग की ओर संकेत करता है। किसी वेबसाइट, एडवरटाइजमेंट या ऐसी कोई लिंक पर क्लिक होते ही आपके मोबाइल का रिमोट एक्सेस ठगों के पास पहुंच जाता है। इसकी भनक तक पीड़ित को नहीं लगती है। अनजान एप्लीकेशन इंस्टाल करने पर भी रिमोट एक्सेस होता है।
रिमोट एक्सेस मिलने के बाद ठग आपकी गतिविधियों को बारिकी से देखते हैं। पासवर्ड, बैंक डिटेल सहित सभी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। सप्ताहभर हो जाने के बाद वे ओटीपी या पासवर्ड से रुपये निकाल लेते हैं। अकाउंट चेक करने पर ठगी का मालूम होता है। इससे बचने के लिए संदिग्ध लिंक न खोलें और बैंक खाते से अनधिकृत ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत बैंक तथा साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें। मोबाइल में एम-कवच एप को इंस्टाल करके रखे।
इस तरह से होती है ठगी
- सिम स्वैपिंग : ठग मोबाइल नंबर का डुप्लीकेट सिम जारी कराकर ओटीपी हासिल कर लेते हैं।
- मोबाइल मैलवेयर : फोन में कोई संदिग्ध ऐप या लिंक के जरिए वायरस आने पर बैंकिंग जानकारी चोरी हो सकती है।
- इंटरनेट बैंकिंग हैक : यदि यूज़रनेम-पासवर्ड पहले कहीं लीक हो गए हों तो खाते तक पहुंच बनाई जा सकती है।
- स्क्रीन शेयरिंग ऐप : कई बार अनजाने में इंस्टाल हुए ऐप बैंकिंग गतिविधि रिकार्ड कर लेते हैं।
- बैंकिंग सिस्टम या कार्ड क्लोनिंग : एटीएम/डेबिट कार्ड की जानकारी कापी होने पर भी ट्रांजेक्शन संभव हैं।

