Pratappur Sushasan Shivir Me Hungama: सूरजपुर/प्रतापपुर। प्रतापपुर विकासखंड के टुकुडांड में शुक्रवार को आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण एवं सुशासन शिविर उस समय हंगामे में बदल गया, जब जिला पंचायत सदस्य और किसान नेता सुरेश आयाम अपने समर्थकों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ विरोध प्रदर्शन करने पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में काला झंडा और बांहों पर काली पट्टी बांध रखी थी। शिविर स्थल पहुंचते ही उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
“सुशासन त्योहार ढकोसला है”, “किसानों को न्याय दो”, “भ्रष्टाचार बंद करो” और “जनता की समस्याओं का समाधान करो” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। अचानक हुए विरोध प्रदर्शन से कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी मच गई और प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति बन गई।
जानकारी के अनुसार शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण और शासन की योजनाओं की जानकारी देने का दावा किया जा रहा था। कार्यक्रम में कई प्रशासनिक अधिकारी, विभागीय कर्मचारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। इसी दौरान सुरेश आयाम अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और किसानों की समस्याओं, पेयजल संकट, अधूरे विकास कार्य, खराब सड़कों और कथित भ्रष्टाचार को लेकर विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कई बार शिकायत और ज्ञापन देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस दौरान जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम और अधिकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे, जबकि अधिकारी उन्हें शांत कराने का प्रयास करते रहे।
स्थिति बिगड़ते देख प्रतापपुर पुलिस ने हस्तक्षेप किया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। बताया जा रहा है कि कुछ प्रदर्शनकारी जमीन पर बैठ गए और हिरासत में जाने से इनकार करने लगे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सुरेश आयाम समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर प्रतापपुर थाने पहुंचाया।
थाने ले जाते समय भी प्रदर्शनकारी प्रशासन और शासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। बाद में पुलिस और अधिकारियों की समझाइश के बाद सभी को छोड़ दिया गया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे पूरे प्रतापपुर क्षेत्र का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है।
ग्रामीणों और समर्थकों ने प्रशासनिक कार्रवाई को जनआवाज दबाने का प्रयास बताया है, जबकि प्रशासन का कहना है कि सरकारी कार्यक्रम में व्यवधान और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। टुकुडांड की इस घटना ने सुशासन शिविर की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

