प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित हजारों ग्रामीणों ने दुर्ग कलेक्टर कार्यालय पर किया प्रदर्शन, आवेदन के बावजूद नहीं मिला लाभ, सिस्टम की खामियों पर उठाए गंभीर सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित हजारों ग्रामीणों ने दुर्ग कलेक्टर कार्यालय पर किया प्रदर्शन, आवेदन के बावजूद नहीं मिला लाभ, सिस्टम की खामियों पर उठाए गंभीर सवाल

Durg Villagers Protest दुर्ग। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर दुर्ग जिले में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां हजारों पात्र हितग्राही योजना के लाभ से वंचित होने का आरोप लगा रहे हैं। बुधवार 8 अप्रैल को जनपद अंजोरा खा के बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों पहले योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन उन्हें बार-बार अपात्र घोषित कर दिया जा रहा है।

ग्रामीणों ने जिला पंचायत के उस दावे पर भी सवाल उठाए, जिसमें दुर्ग को योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए ‘प्रथम स्थान’ मिलने की बात कही गई है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार यह उपलब्धि केवल कागजों में सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर वास्तविक पात्र लोगों को अब तक आवास का लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक आंकड़े और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर है, जिससे आम लोगों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

शिकायतकर्ताओं ने विभागीय लापरवाही और सिस्टम की खामियों को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि केवल दुर्ग जनपद में ही करीब 353 लोगों को गलत तरीके से अपात्र घोषित कर ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। कई ऐसे हितग्राही हैं जिनके नाम वर्ष 2018 से सूची में शामिल हैं, लेकिन आज तक उन्हें आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है। सर्वे प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद लाभ नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी साफ तौर पर देखी जा रही है।

इसी बीच पूर्व जनपद सदस्य महिला एवं बाल विकास समिति पूनम वैष्णव ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि वह अविवाहित हैं और पिछले आठ वर्षों से आवास के लिए संघर्ष कर रही हैं। परिवार का कोई सहारा नहीं होने के कारण वह हॉस्टल में कार्य कर जीवन यापन कर रही हैं और कई बार त्योहारों के दौरान दूसरों के घरों में रहने को मजबूर हो जाती हैं। उनका वर्तमान मकान पूरी तरह जर्जर हो चुका है, दीवारों में दरारें हैं और पानी के रिसाव के कारण घर रहने योग्य नहीं बचा है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें जल्द से जल्द योजना के तहत मकान स्वीकृत किया जाए, ताकि उन्हें स्थायी आश्रय मिल सके और वे अपने बीमार परिजनों की देखभाल कर सकें। ग्रामीणों का अनुमान है कि केवल दुर्ग जिले में ही करीब एक हजार लोग इस तरह की त्रुटियों के कारण योजना से वंचित हैं, जबकि पूरे प्रदेश में यह संख्या 25 से 30 हजार तक पहुंच सकती है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

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