खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 बना बदलाव का जरिया, मैरी कॉम और भूटिया ने कहा- स्क्रीन टाइम घटाकर बच्चों को खेल मैदान में लाना होगा, तभी तैयार होंगे भविष्य के स्टार खिलाड़ी

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 बना बदलाव का जरिया, मैरी कॉम और भूटिया ने कहा- स्क्रीन टाइम घटाकर बच्चों को खेल मैदान में लाना होगा, तभी तैयार होंगे भविष्य के स्टार खिलाड़ी

रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के दौरान भारत की दिग्गज मुक्केबाज़ एमसी मैरी कॉम और भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने जमीनी स्तर पर खेलों में निवेश और मजबूत संरचना की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों खिलाड़ियों ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि यदि भारत को भविष्य के चैंपियन तैयार करने हैं तो प्रतिभा और उत्कृष्टता के बीच की खाई को पाटना बेहद जरूरी है, जिसमें खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसी पहल अहम भूमिका निभा सकती हैं।

दोनों खिलाड़ियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज के दौर में बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने भारतीय परिवारों से अपील की कि वे बच्चों को मोबाइल और डिजिटल उपकरणों से दूर रखते हुए मैदान की ओर प्रेरित करें, ताकि वे विभिन्न खेलों का अनुभव ले सकें और अपनी प्रतिभा को पहचान सकें।

भूटिया ने कहा कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसी पहल निश्चित रूप से एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन लंबे समय तक सफलता हासिल करने के लिए देश में खेलों की बुनियाद को मजबूत करना आवश्यक है। अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उस समय भारतीय खेल प्राधिकरण ने युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने खुद को साई का प्रोडक्ट बताते हुए कहा कि 1986 के पहले बैच का हिस्सा होने के नाते उन्होंने जमीनी स्तर के विकास की अहमियत को करीब से देखा है।

उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर भारत में शीर्ष स्तर के खेलों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, जबकि असली जरूरत जमीनी स्तर पर निवेश बढ़ाने की है। भूटिया के अनुसार खेलों की पिरामिड संरचना तभी मजबूत हो सकती है जब उसकी नींव मजबूत हो। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में, लेकिन उसे सही दिशा, संसाधन और अवसर मिलना जरूरी है।

भूटिया ने आदिवासी समुदायों की खेल प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर भारत इसके सबसे बड़े उदाहरणों में से एक है, जहां से कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सही मंच और अवसर मिलते रहे तो आने वाले वर्षों में आदिवासी क्षेत्रों से और भी अधिक खिलाड़ी उभरकर सामने आएंगे और देश को वैश्विक मंच पर गौरवान्वित करेंगे।

अपने शुरुआती जीवन का उदाहरण देते हुए भूटिया ने बताया कि सिक्किम में उनका बचपन फुटबॉल संस्कृति के बीच बीता, जहां हर गांव और कस्बे में यही खेल प्रमुख था। उन्होंने कहा कि माहौल और अवसर किसी भी खिलाड़ी के विकास में निर्णायक भूमिका निभाते हैं और यही कारण है कि सही परिवेश मिलने पर प्रतिभाएं निखरकर सामने आती हैं।

वहीं मैरी कॉम ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स को एक परिवर्तनकारी पहल बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार को इस पहल के लिए बधाई दी और कहा कि यह कार्यक्रम उन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए नया रास्ता खोल सकता है, जिन्हें पहले पर्याप्त मंच और जागरूकता नहीं मिल पाती थी।

मैरी कॉम ने कहा कि आदिवासी समुदायों में अपार क्षमता है, लेकिन पहले उन्हें आगे बढ़ने के लिए जरूरी अवसर नहीं मिलते थे। उन्होंने कहा कि अब हालात बदल रहे हैं और सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। उन्होंने विशेष रूप से नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने युवाओं को आगे आने और खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही आज अवसर पहले से अधिक उपलब्ध हैं, लेकिन सफलता हासिल करने के लिए अनुशासन, समर्पण और धैर्य की आवश्यकता सबसे अधिक होती है। मैरी कॉम ने युवा खिलाड़ियों से अपील की कि वे इन अवसरों का पूरा लाभ उठाएं और अपने लक्ष्य की ओर लगातार मेहनत करते रहें, क्योंकि यही उन्हें भविष्य में देश का प्रतिनिधित्व करने के योग्य बनाएगा।

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