जिला निर्वाचन अधिकारी सुधार नहीं सके मतदाता सूची, 40 से अधिक मृतकों, 50 से अधिक प्रवासी सहित कुल 784 मतदाता चुनेंगे नए पदाधिकारी

जिला निर्वाचन अधिकारी सुधार नहीं सके मतदाता सूची, 40 से अधिक मृतकों, 50 से अधिक प्रवासी सहित कुल 784 मतदाता चुनेंगे नए पदाधिकारी

शुभम वर्मा, संपादक।

रायपुर प्रेस क्लब का 2026 का चुनाव इस बार कई मायनों में अलग, दिलचस्प और निर्णायक माना जा रहा है। अब तक हुए चुनावों की साम्यता यही है कि यह चुनाव भी 2017- 18 की सदस्यता सूची से ही आयोजित है उसमें 2024 में केवल 2 जोड़े गए नाम इसकी मतदाता सूची में शामिल है करीब 42 ऐसे लोगों के नाम भी इस चुनाव के मतदाता सूची में शामिल हैं जिनका देहावसान हो चुका है। पिछले 8 वर्षों में बने नए सदस्य इस सूची में शामिल नहीं हैं। पहले की तुलना में इस बार मुकाबला केवल पदों का नहीं, बल्कि पीढ़ियों की सोच और नेतृत्व शैली का भी है।

अनुभव, वरिष्ठता और गुटीय समीकरण

अब तक के चुनावों में आमतौर पर अनुभव, वरिष्ठता और गुटीय समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। सीमित प्रत्याशी, अपेक्षाकृत शांत चुनाव प्रचार और पूर्वनिर्धारित समीकरणों के बीच नतीजे अक्सर अनुमान के दायरे में रहते थे। लेकिन 2026 का चुनाव इन तमाम परंपराओं को तोड़ता नजर आ रहा है।

यह हैं इस बार के क्रमानुसार सबसे मजबूत पैनल

संकल्प पैनल- अध्यक्ष प्रत्याशी प्रफुल्ल ठाकुर, उपाध्यक्ष प्रत्याशी दिलीप साहू, महासचिव प्रत्याशी संदीप शुक्ला, कोषाध्यक्ष प्रत्याशी अरविन्द सोनवानी, संयुक्त सचिव विनीता मंडल।

संगवारी पैनल- मोहन तिवारी अध्यक्ष प्रत्याशी, महासचिव प्रत्याशी गौरव शर्मा, कोषाध्यक्ष प्रत्याशी दिनेश यदु, दो संयुक्त सचिव प्रत्याशी निवेदिता साहू और संतोष साहू।

प्रतिष्ठा पैनल- अध्यक्ष प्रत्याशी अनिल पुसदकर, उपाध्यक्ष प्रत्याशी रमन हलवाई, कोषाध्यक्ष प्रत्याशी राहुल चौबे, महासचिव प्रत्याशी महादेव तिवारी, दो संयुक्त सचिव प्रत्याशी लखन शर्मा और हेमंत डोंगरे।

क्रांतिकारी पैनल- अध्यक्ष प्रत्याशी सुनील नामदेव, उपाध्यक्ष प्रत्याशी सुधीर आजाद तम्बोली, महासचिव प्रत्याशी सुरेंद शुक्ला, कोषाध्यक्ष प्रत्याशी कुलदीप शुक्ला, संयुक्त सचिव प्रत्याशी शिवशंकर सारथी।

सर्व एकता पेनल- अध्यक्ष प्रत्याशी केके शर्मा, उपाध्यक्ष प्रत्याशी विकास यादव, महासचिव प्रत्याशी दानिश अनवर, कोषाध्यक्ष प्रत्याशी नागेंद्र वर्मा, संयुक्त सचिव प्रत्याशी प्रदीप चंद्रवंशी।

परिवर्तन पैनल- अध्यक्ष प्रत्याशी प्रशांत दुबे, उपाध्यक्ष प्रत्याशी भोलाराम सिन्हा, महासचिव प्रत्याशी पराग मिश्रा, कोषाध्यक्ष प्रत्याशी नदीम मेमन, दो संयुक्त सचिव उमेश यदु और भूपेश जांगड़े।

इस बार चुनावी मैदान में ऊर्जा, नए विचार, डिजिटल सोच और पारंपरिक अनुभव का सीधा टकराव देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि इस बार किसी भी प्रत्याशी के लिए अपना परचम लहराना उतना आसान नहीं होगा।

चुनाव प्रक्रिया के तहत 10 जनवरी नाम वापसी के बाद कुल 37 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें अध्यक्ष पद के लिए 6 प्रत्याशी, उपाध्यक्ष पद के लिए 8 प्रत्याशी, कोषाध्यक्ष पद के लिए 6 प्रत्याशी, महासचिव पद के लिए 8 प्रत्याशी और संयुक्त सचिव के 2 पद के लिए 09 प्रत्याशी मैदान में है। नामांकन की यह संख्या खुद इस बात का संकेत है कि चुनाव कांटे का और बहुकोणीय होने जा रहा है। वहीं कुछ पत्रकार किसी पैनल में शामिल हुए बिना स्वतंत्र रूप से विभिन्न पदों के लिए मैदान में हैं, जो चुनाव को और दिलचस्प बना रहे हैं। इन स्वतंत्र उम्मीदवारों में उपाध्यक्ष पद के लिए शरणजीत सिंह तेतरी तथा अजय सक्सेना, महासचिव पद के लिए सागर फरीकर, पीयूष मिश्रा शामिल हैं।

आखिर किसके हाथो में होगा कमान?

मीडिया जगत में बदलते दौर, पत्रकारिता की नई चुनौतियों और संगठनात्मक अपेक्षाओं के बीच यह चुनाव तय करेगा कि रायपुर प्रेस क्लब की कमान अनुभव के हाथों में रहेगी या नई पीढ़ी को मौका मिलेगा। आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और समीकरणों के साथ यह मुकाबला और रोचक होने वाला है। चुनाव के दौर में प्रेस क्लब में इन दिनों मजेदार स्थितियां दिखाई दे रही हैं, जिस पैनल ने कभी कहीं कोई क्रांति नहीं की न खबरों में न पत्रकारों की बेहतरी के लिए कभी मालिकों से कोई पंगा लिया, जिसे कोई क्रांति कहीं नहीं करनी है उसका नाम क्रांतिकारी पैनल है।

जिस पैनल का संकल्प या वायदे समय पर पूरे कर पाने का ठीक ठाक रिकॉर्ड नहीं दिख रहा उसका नाम संकल्प पैनल। इसी तरह जिस पैनल में शामिल लोग चुनाव के पहले एक टेबल पर बैठ कर कभी बातें करते नहीं देखे गए वह संगवारी पैनल और जिस पैनल में शामिल लोगों में उम्र, समुदाय, कामकाज, अभिरुचि का कोई तालमेल नहीं वो सर्व एकता पैनल के नाम से मैदान में है। दूसरी ओर परिवर्तन पैनल में शामिल टीम पिछले दो वर्षों से अलग अलग गुटों से दावेदारी करने वाले उम्मीदवारों से परिपूर्ण है जिन्होंने इस चुनाव में अपने गुट से परिवर्तित हो कर इस नौका में सवार होने का फैसला लिया है। एक प्रतिष्ठा पैनल है जिसमें इतने प्रतिष्ठित उम्मीदवार हैं जो पिछले 3 दशक से एक तरह से प्रेसक्लब के हर चुनाव में दखल रखते रहे हैं, प्रेस क्लब की प्रतिष्ठा इन वर्षों में कब कब कितनी बच पाई हो, कब बड़ी हो ये बात अलग है।

ऐसे में दिलचस्प है कि 13 जनवरी को होने वाले चुनाव में इन पैनलों से एकसाथ या अलग अलग भी पदाधिकारी यदि चुने भी जाते हैं तो नए कार्यकारिणी की तस्वीर बहुत रोचक होने की संभावना है। ज्यादातर पैनल में संगठित टीम न होने की स्थिति दिख रही है ऐसे में यह उम्मीद करना कि ये असंबद्ध और बिखरे बिखरे उम्मीदवार जीतने के बाद टीम वर्क से प्रेस क्लब सदस्यों की बेहतरी के लिए काम कर पाएंगे, मानना मुश्किल है।


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