Voter Adhikar Yatra: राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में जेब कतरों का आतंक! पूर्व केंद्रीय मंत्री और RJD नेता का मोबाइल-पर्स चोरी

Voter Adhikar Yatra: राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में जेब कतरों का आतंक! पूर्व केंद्रीय मंत्री और RJD नेता का मोबाइल-पर्स चोरी

Voter Adhikar Yatra: दरभंगा: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में जेब कतरों का आतंक देखा जा रहा है। दरभंगा में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में जेबकतरों ने आरजेडी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अली असरफ फातमी का पर्स चुरा लिया। वहीं, आरजेडी नेता भोला सहनी का मोबाइल और पर्स चोरी करते एक युवक को रंगेहाथ पकड़ लिया गया। युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

कई कार्यकर्ताओं के भी जेब कटे

जानकारी के अनुसार, दरभंगा में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान बदमाशों ने भीड़ का फायदा उठाकर कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के पर्स और मोबाइल पर हाथ साफ कर दिया। यात्रा में शामिल भीड़ के बीच कई अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की चोरी की वारदातें हुईं। इससे लोगों में आक्रोश है और पुलिस की चौकसी पर सवाल उठने लगे हैं। 

कई आम लोगों के भी जेब कटे

बताया जा रहा है कि अज्ञात बदमाशों ने राष्ट्रीय जनता दल के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अली असरफ फातमी का पर्स चुरा लिया। इतना ही नहीं, राजद नेता भोला सहनी का पर्स और मोबाइल फोन भी चोरी हो गया। यात्रा में उमड़ी भारी भीड़ में न केवल नेताओं, बल्कि आम लोगों के भी कई पर्स और मोबाइल फोन जेबकतरों के हाथ लग गए।  

घटना की पुष्टि करते हुए फातमी ने कहा, “सिर्फ़ मेरा ही नहीं, बल्कि कई अन्य कार्यकर्ताओं और नेताओं का सामान चोरी हुआ है। भोला साहनी ने भी स्वीकार किया कि उनका मोबाइल और पर्स चोरी हुआ है। फ़िलहाल, पुलिस गिरफ़्तार युवक से पूछताछ कर चोरी के अन्य मामलों की जांच कर रही है।

बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमलावर हैं राहुल गांधी

बता दें कि राहुल गांधी वोटर अधिकार यात्रा के तहत आज मोतिहारी पहुंच रहे है। यात्रा 11वें दिन दरभंगा से शुरू हुई और दोपहर में मुजफ्फरपुर पहुंची और शाम के समय सीतामढ़ी में दाखिल हुई। इस दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और निर्वाचन आयोग पर तीखे हमले जारी रखे और आरोप लगाया कि बीजेपी का ‘‘गुजरात मॉडल’’ कोई ‘‘आर्थिक मॉडल’’ नहीं, बल्कि ‘‘वोट चोरी का मॉडल’ है, जिसे 2014 में राष्ट्रीय स्तर पर लाया गया। 


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