राजधानी रायपुर में पुलिस ने कार का कांच तोड़कर दो कारोबारियों के 13 लाख रुपए की उठाईगिरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 6 सदस्यों को पकड़ा है। आरोपी त्रिची गिरोह के सदस्य हैं। आरोपियों के खिलाफ गंज और देवेंद्र नगर थाने में दो अलग-अलग केस दर्ज थे। गिरफ्तार आरोपियों के नाम तमिलनाडु निवासी किट्टू, ए विनोद कुमार, बाला मुरूगन कुमरेशन डी., भास्कर और रंगन ए हैं।
पुलिस ने बताया कि गिरोह के कुछ सदस्य अभी फरार हैं। उनकी तलाश में पुलिस टीम लगातार जुटी हुई है और आगे की कार्रवाई भी की जा रही है।
किस मामले में हुए गिरफ्तार
विधानसभा निवासी कारोबारी प्रवेश अग्रवाल और महासमुंद निवासी कारोबारी प्रदीप ने आरोपियों के खिलाफ गंज और देवेंद्र नगर थाने में शिकायत दी थी। कारोबारियों ने बताया कि आरोपियों ने उनकी कार का कांच तोड़कर उसमें रखा बैग चोरी कर लिया। प्रवेश अग्रवाल के बैग में 10 लाख रुपए और प्रदीप के बैग में 3 लाख रुपए के साथ इलेक्ट्रॉनिक सामान था। पीड़ितों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले में केस दर्ज किया और जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
96 घंटे के अंदर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया
एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने हजारों सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की। रायपुर, दुर्ग, डोंगरगढ़, सम्बलपुर, टाटा और रांची रेलवे स्टेशनों में आरोपियों की तलाश की गई। 96 घंटे के भीतर पुलिस टीम ने रांची के धुर्वाडैम इलाके से सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि आरोपी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों में अपराध कर चुके हैं।
चोरी के दौरान हर मेंबर का होता था अलग-अलग काम
गिरोह चोरी के दौरान हर सदस्य का अलग काम होता था। यह गैंग हेयर पिन और रबड़ से गुलेल बनाकर कार की खिड़कियां तोड़ता और बैग, नकद लेकर फरार हो जाता था। जांच में पता चला कि कुछ सदस्य पहले कार की रेकी करते थे। अगर कार में बैग दिखाई देता, तो वे दूसरे सदस्य को इशारा करते थे। इशारा मिलने पर दूसरा सदस्य कार का कांच तोड़ता। कांच टूटते ही तीसरा सदस्य बैग और नकद लेकर भागता।
इस बीच गैंग का अन्य सदस्य बीच रास्ते में सामान लेकर रास्ता बदल देता और शहर छोड़ देता।
देश भर में दर्जनों चोरी की वारदातें
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे देश भर में घूम-घूम कर इसी तरीके से चोरी की घटनाएं कर चुके हैं। वे खड़ी कार में रखे बैग को अपना निशाना बनाते थे। अपनी पहचान छिपाने और पुलिस से बचने के लिए आरोपी होटलों में नहीं रुकते, बल्कि रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म पर ठहरते और बिना टिकट ट्रेन में यात्रा करते थे।
त्रिची गैंग का इतिहास
त्रिची गैंग के सदस्य तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के रहने वाले हैं। ये देश भर में घूम-घूमकर उठाईगिरी, लूट और डकैती की घटनाओं को अंजाम देते हैं। गैंग की संख्या हमेशा बदलती रहती है, आमतौर पर दो से सात सदस्य एक साथ रहते हैं। इनके ठिकाने रेलवे स्टेशन होते हैं, जहां ये देर रात सोते हैं।
ये शातिर अपराधी भिखारी जैसी दिखावट रखते हैं, लेकिन बेहद खतरनाक होते हैं। योजना बनाने और चोरी की वारदात करने का पूरा प्लान वे रेलवे स्टेशन पर ही बनाते हैं। गैंग के हर सदस्य का काम तय होता है और हर कोई अपने हिस्से का काम करके मौके से भाग जाता है।

